शुद्ध पदार्थ
शुद्ध पदार्थ में केवल एक ही प्रकार का पदार्थ पाया जाता है एवं इनके कण समान होते हैं।
सोना, चाँदी, लोहा, ताँबा, नमक एवं शक्कर आदि शुद्ध पदार्थ हैं।
शुद्ध पदार्थ तत्व एवं यौगिक में बँटे होते हैं।
उदाहरण: शुद्ध नमक में केवल सोडियम क्लोराइड होता है, बिना किसी अन्य पदार्थ के मिश्रण के।
तत्व
तत्वों के अणुओं में केवल एक ही प्रकार के परमाणु होते हैं।
लोहा, ताँबा, चाँदी, सोना, ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन आदि तत्व हैं।
एक ही तत्व के एक या एक से अधिक समान प्रकार के परमाणु मिलकर उसी तत्व का एक अणु बनाते हैं।
तत्व एवं उनसे मिलकर बने अणुओं के गुण समान होते हैं।
उदाहरण: ऑक्सीजन गैस (O₂) में दो ऑक्सीजन परमाणु होते हैं, और इसके गुण शुद्ध ऑक्सीजन के समान हैं।
यौगिक
यौगिक के अणु दो या दो से अधिक विभिन्न प्रकार के परमाणुओं से मिलकर बने होते हैं।
जल का अणु हाइड्रोजन के दो परमाणु तथा ऑक्सीजन के एक परमाणु से मिलकर बना है।
यौगिक के गुण उनके अवयवी तत्वों के गुणों से सर्वथा भिन्न होते हैं। जैसे, सामान्य ताप पर हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन गैस हैं, जबकि उनसे मिलकर बना जल द्रव है।
उदाहरण: कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) में कार्बन और ऑक्सीजन के परमाणु होते हैं, और यह गैस है, जबकि कार्बन ठोस है।
मिश्रण
मिश्रण दो या दो से अधिक पदार्थों से मिलकर बने होते हैं।
मिश्रण में मिश्रित अवयवों के सभी गुण पाए जाते हैं। जैसे, नींबू के शरबत में शक्कर की मिठास तथा नींबू के खट्टेपन का स्वाद होता है।
उदाहरण: हवा में ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, और अन्य गैसें होती हैं, और प्रत्येक के गुण मौजूद रहते हैं।
मिश्रण के प्रकार
मिश्रण दो प्रकार के होते हैं:
- समांगी मिश्रण: ऐसे मिश्रण जिनमें दो या दो से अधिक अवयव उपस्थित रहते हैं, किंतु
उन्हें अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। मिश्रण के सभी अवयव समान रूप से वितरित होते हैं।
उदाहरण: वायु, नमक का घोल। - विषमांगी मिश्रण: ऐसे ठोस अथवा द्रव पदार्थों के मिश्रण जिनमें उनके अवयवी
पदार्थों को सामान्यतः अलग-अलग देखा जा सकता है। सभी घटक समान रूप से वितरित नहीं होते।
उदाहरण: बालू और पानी, चावल और कंकड़।
मिश्रण के गुण
मिश्रण में घटक अवयव किसी भी अनुपात में मिले होते हैं।
मिश्रण में घटकों के अपने गुण विद्यमान रहते हैं।
मिश्रण से उनके घटकों को पृथक किया जा सकता है।
उदाहरण: नींबू के शरबत से पानी को वाष्पीकरण द्वारा अलग किया जा सकता है।
पृथक्करण की आवश्यकता
पृथक्करण की आवश्यकता इसलिए होती है क्योंकि:
- मिश्रण से शुद्ध पदार्थ प्राप्त करना।
- अनुपयोगी या हानिकारक पदार्थों को हटाना।
- पदार्थों को उनके उपयोग के लिए उपयुक्त बनाना।
उदाहरण: चावल से कंकड़ हटाने के लिए बीनना, समुद्र के पानी से नमक प्राप्त करने के लिए वाष्पीकरण।
पृथक्करण की सामान्य विधियाँ
बीनना (Handpicking): चावल तथा दाल में कुछ अनुपयोगी पदार्थ जैसे कंकड़, मिट्टी आदि
मिले होते हैं जो चावल तथा दाल की आकृति, आकार अथवा रंग से भिन्न होते हैं। अतः इन्हें हाथ से बीनकर
पृथक कर लिया जाता है। इस प्रक्रिया को बीनना कहते हैं।
उदाहरण: चावल से छोटे
पत्थर निकालना।
फटकना (Winnowing): हल्के ठोस घटकों को उनके भारी ठोस घटकों से पृथक करने के लिए हवा की
सहायता से फटकना विधि का उपयोग किया जाता है।
उदाहरण: भूसी से गेहूँ के दाने अलग
करना।
चालना (Sieving): भिन्न-भिन्न आकार के घटकों को पृथक करने के लिए विभिन्न आकार एवं
आकृति के छेद वाले छलनी का प्रयोग किया जाता है। यह प्रक्रिया चालना कहलाती है।
उदाहरण: आटे से भूसी को अलग करना।
थ्रेशिंग (Threshing): अन्न को पके हुए पौधों से अलग करने की प्रक्रिया को थ्रेशिंग
कहते हैं।
उदाहरण: अरहर की दाल या धान को सूखे पौधों से अलग करना।
निथारना (Decantation): बालू और पानी के मिश्रण से पानी को सावधानी से ऊपर से निकालना
निथारना कहलाता है।
उदाहरण: मटके में रखे पानी से मिट्टी को अलग करना।
छानना (Filtration): द्रव में अघुलनशील पदार्थ के मिश्रण के घटकों को छानकर पृथक किया
जा सकता है। छानना पत्रक (Filter Paper) द्वारा छोटे कणों को द्रव से छानकर पृथक करते हैं।
उदाहरण: चाय को छानकर चायपत्ती अलग करना।
ऊर्ध्वपातन (Sublimation): वह प्रक्रिया जिसमें ठोस पदार्थ गर्म करने पर बिना द्रवित
हुए सीधे वाष्प में बदल जाते हैं और ठंडा होने पर वाष्प सीधे ठोस पदार्थ में बदल जाते हैं, ऊर्ध्वपातन
कहलाती है।
उदाहरण: कपूर और साधारण नमक के मिश्रण से कपूर को अलग करना।
वाष्पीकरण (Evaporation): किसी द्रव का वाष्प में परिवर्तित होना वाष्पन कहलाता है। यह
क्रिया वाष्पीकरण कहलाती है।
उदाहरण: समुद्र से नमक प्राप्त करना।
क्रिस्टलीकरण (Crystallization): किसी पदार्थ के शुद्ध तथा बड़े माप के क्रिस्टल उसके
विलयन से प्राप्त किए जा सकते हैं। यह प्रक्रिया क्रिस्टलीकरण कहलाती है।
उदाहरण:
शक्कर के घोल से शुद्ध शक्कर के क्रिस्टल बनाना।
चुम्बकीय पृथक्करण (Magnetic Separation): किसी मिश्रण से चुम्बकीय पदार्थों को अलग
करना चुम्बकीय पृथक्करण विधि कहलाती है।
उदाहरण: लकड़ी के बुरादे से लोहे की
वस्तुएँ अलग करना।
अपकेन्द्रण (Centrifugation): तेजी से घुमाकर भारी कणों को अलग करना।
उदाहरण: दूध से क्रीम को अलग करना।
आसवन (Distillation): किसी विलयन से वाष्पीकरण और संघनन विधि द्वारा शुद्ध द्रव को
प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसवन कहते हैं।
उदाहरण: समुद्री पानी से शुद्ध जल
प्राप्त करना।
क्रोमैटोग्राफी (Chromatography): रंगों में पाए जाने वाले विभिन्न अवयवों को पृथक करने
में क्रोमैटोग्राफी विधि का प्रयोग करते हैं।
उदाहरण: स्याही के विभिन्न रंगों को
अलग करना।