पौधों में जनन

विस्तृत नोट्स

🌱 जनन की अवधारणा (Concept of Reproduction)

परिभाषा: जनन वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा पौधे अपनी प्रजाति को बनाए रखते हैं और नए पौधों का निर्माण करते हैं। यह प्रक्रिया जीवन के निरंतर अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक है। उदाहरण: गुलाब का पौधा तने की कटिंग से नया पौधा बनाता है।

  • जनन से पौधों की प्रजातियाँ लुप्त होने से बचती हैं।
  • जनन दो प्रकार का होता है — लैंगिक और अलैंगिक।

🔬 जनन की विधियाँ (Methods of Reproduction)

परिभाषा: वे जैविक प्रक्रियाएँ जिनके द्वारा पौधे नए पौधे उत्पन्न करते हैं, जनन की विधियाँ कहलाती हैं। उदाहरण: सरसों के पौधे में बीजों द्वारा (लैंगिक) और आलू में कंद द्वारा (अलैंगिक) जनन।

  • लैंगिक जनन (Sexual Reproduction): नर और मादा युग्मकों के संलयन से नया पौधा बनता है। उदाहरण: सूरजमुखी के फूल से बीज बनना।
  • अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction): बिना युग्मक संलयन के पौधे के किसी भाग से नया पौधा बनता है। उदाहरण: गुलाब की कटिंग से नया पौधा।

🌸 लैंगिक जनन (Sexual Reproduction in Plants)

परिभाषा: यह वह प्रक्रिया है जिसमें नर और मादा युग्मक मिलकर नए पौधे का निर्माण करते हैं। उदाहरण: मटर और सूरजमुखी के पौधों में बीज बनना।

महत्व:

  • आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है — नए गुणों वाले पौधे बनते हैं। उदाहरण: विभिन्न रंगों के गुलाब।
  • रोग-प्रतिरोधी या अधिक उत्पादन वाली नई प्रजातियाँ विकसित की जा सकती हैं। उदाहरण: रोग-प्रतिरोधी सरसों की किस्में।

प्रकार:

  • स्व-परागण (Self-Pollination): परागकण उसी फूल के अंडाशय में गिरते हैं। उदाहरण: मटर का पौधा।
  • पर-परागण (Cross-Pollination): परागकण एक फूल से दूसरे फूल तक हवा, कीट या पानी द्वारा पहुँचते हैं। उदाहरण: गुड़हल और सूरजमुखी।

परागण में सहायक कारक:

  • कीट परागण — मधुमक्खी, तितली।
  • पवन परागण — धान, मक्का।
  • जल परागण — जलीय पौधे जैसे वेलिस्नेरिया।

🌿 अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction in Plants)

परिभाषा: बिना युग्मक संलयन के पौधे के किसी भाग से नया पौधा बनने की प्रक्रिया। उदाहरण: आलू के कंद या गुलाब की कटिंग से नया पौधा।

अलैंगिक जनन के प्रकार:

  • कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation): पौधे के तने, जड़, या पत्तियों से नया पौधा बनता है। उदाहरण: गुलाब (तना), गाजर (जड़), बृयॉफिलम (पत्तियाँ)।
  • मुकुलन (Budding): पौधे या सूक्ष्मजीव पर छोटे मुकुल से नया जीव बनता है। उदाहरण: यीस्ट (खमीर) में मुकुलन।
  • खंडन (Fragmentation): पौधे का कोई भाग टूटकर नया पौधा बनाता है। उदाहरण: स्पाइरोजाइरा (शैवाल)।
  • बीजाणु निर्माण (Spore Formation): बीजाणु नामक सूक्ष्म संरचनाओं से नए पौधे बनते हैं। उदाहरण: फर्न, मॉस, राइजोपस (ब्रेड मोल्ड)।

अलैंगिक जनन का महत्व:

  • तेजी से और एकसमान पौधे उत्पन्न होते हैं। उदाहरण: गन्ने की कटिंग से समान पौधे।
  • फूल या बीज न बनने वाले पौधों में उपयोगी। उदाहरण: केला, आलू।
  • कृषि और बागवानी में आर्थिक रूप से लाभदायक। उदाहरण: गुलाब और गेंदा के पौधे नर्सरी में इसी विधि से उगाए जाते हैं।

🌸 पुष्प के भाग (Parts of a Flower)

परिभाषा: पुष्प (Flower) पौधे का प्रजनन अंग है, जो लैंगिक जनन में मुख्य भूमिका निभाता है। इसमें नर (पुंकेसर) और मादा (जायांग) अंग होते हैं। उदाहरण: सूरजमुखी, गुड़हल।

  • बाह्यदल (Sepals): फूल की कली (bud) को सुरक्षा प्रदान करते हैं और प्रायः हरे रंग के होते हैं। उदाहरण: गुलाब की कलियों में बाह्यदल उसे खुलने से पहले ढकते हैं।
  • पंखुड़ियाँ (Petals): रंगीन भाग जो कीटों और पक्षियों को आकर्षित करते हैं। इनमें सुगंध और रंग होता है। उदाहरण: सूरजमुखी की चमकीली पीली पंखुड़ियाँ।
  • पुंकेसर (Stamens): यह नर जनन अंग है जिसमें परागकोश (Anther) में परागकण (Pollen grains) बनते हैं। उदाहरण: सरसों के फूल में कई पीले पुंकेसर।
  • जायांग (Pistil): यह मादा जनन अंग है, जिसमें वर्तिकाग्र (Stigma), वर्तिका (Style), और अंडाशय (Ovary) शामिल हैं। उदाहरण: गुड़हल के फूल का लंबा जायांग।

🌼 पुष्प का महत्व

  • पुंकेसर और जायांग मिलकर जनन प्रक्रिया को पूर्ण करते हैं। उदाहरण: सरसों में परागण और निषेचन।
  • पंखुड़ियाँ परागण एजेंट (जैसे मधुमक्खी, तितली) को आकर्षित करती हैं। उदाहरण: चमेली की सुगंध मधुमक्खियों को आकर्षित करती है।
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🌻 परागण (Pollination)

परिभाषा: परागण वह प्रक्रिया है जिसमें परागकण पुंकेसर से मादा वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं। यह पौधों में लैंगिक जनन का पहला चरण है। उदाहरण: मधुमक्खी सरसों के फूलों के बीच परागण करती है।

  • स्व-परागण (Self-Pollination): परागकण उसी फूल या उसी पौधे के दूसरे फूल में जाते हैं। उदाहरण: मटर।
  • पर-परागण (Cross-Pollination): परागकण दूसरे पौधे के फूल में जाते हैं, जिससे आनुवंशिक विविधता बढ़ती है। उदाहरण: सूरजमुखी, आम।

🪶 परागण के एजेंट (Agents of Pollination)

  • हवा (Wind): हल्के परागकण हवा द्वारा फैलते हैं। उदाहरण: मक्का, धान।
  • पानी (Water): जल में रहने वाले पौधों में। उदाहरण: हाइड्रिला, वलिसनेरिया।
  • कीट (Insects): मधुमक्खी, तितली, भौंरा। उदाहरण: गुलाब, सूरजमुखी।
  • पक्षी (Birds): जैसे हमिंग बर्ड या तोता। उदाहरण: ट्यूबरोस (राजनीगंधा)।
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🌱 प्रग्काण का अंकुरण और निषेचन (Germination & Fertilization)

परिभाषा: जब परागकण वर्तिकाग्र पर गिरता है, तो वह अंकुरित होकर पराग नलिका बनाता है। यह नलिका अंडाशय तक पहुँचकर निषेचन (Fertilization) करती है, जहाँ नर युग्मक (Male Gamete) और मादा युग्मक (Female Gamete) मिलकर युग्मनज (Zygote) बनाते हैं।

  • परागकण वर्तिकाग्र पर अंकुरित होता है।
  • पराग नलिका अंडाशय तक पहुँचती है।
  • नर और मादा युग्मक मिलकर युग्मनज बनाते हैं।
  • युग्मनज → भ्रूण (Embryo) → बीज (Seed)। उदाहरण: मटर, सरसों।

🌾 निषेचन का महत्व

  • नए बीज और फल का निर्माण होता है। उदाहरण: सेब का फल बीज से विकसित होता है।
  • प्रजाति का निरंतर अस्तित्व बना रहता है।
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🌿 बीजों का प्रकीर्णन (Seed Dispersal)

परिभाषा: बीजों का मातृ पौधे से दूर विभिन्न स्थानों पर फैलना, जिससे नए पौधे उगते हैं।

  • हवा द्वारा: हल्के और रोएँदार बीज हवा से उड़ते हैं। उदाहरण: कपास, डैंडेलियन।
  • पानी द्वारा: बीज पानी में तैरकर दूर जाते हैं। उदाहरण: नारियल।
  • जन्तुओं द्वारा: बीज जन्तुओं के शरीर या मल द्वारा फैलते हैं। उदाहरण: बेर, कॉकलेबर।
  • विस्फोट द्वारा: फल फटने से बीज दूर छिटकते हैं। उदाहरण: भिंडी, अरहर।

🌾 प्रकीर्णन का महत्व

  • पौधों में प्रतिस्पर्धा कम होती है।
  • नई जगहों पर पौधे उगने लगते हैं। उदाहरण: नारियल के पेड़ तटीय क्षेत्रों में फैल जाते हैं।
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🌼 जनन का महत्व (Importance of Reproduction)

  • प्रजाति का अस्तित्व बनाए रखता है। उदाहरण: गुलाब की पीढ़ियाँ।
  • आनुवंशिक विविधता (Genetic Variation) लाता है, जिससे नए गुण विकसित होते हैं। उदाहरण: फूलों के विभिन्न रंग।
  • पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखता है। उदाहरण: बीजों के फैलाव से जंगल का विस्तार।

सारांश (एक पंक्ति के तथ्य)

  1. जनन पौधों की प्रजाति को बनाए रखने की प्रक्रिया है।
  2. जनन दो प्रकार का होता है: लैंगिक और अलैंगिक।
  3. लैंगिक जनन में नर और मादा युग्मक मिलते हैं।
  4. अलैंगिक जनन में युग्मक संलयन नहीं होता।
  5. लैंगिक जनन आनुवंशिक विविधता उत्पन्न करता है।
  6. अलैंगिक जनन तेजी से एकसमान पौधे बनाता है।
  7. स्व-परागण में परागकण उसी फूल के वर्तिकाग्र पर जाते हैं।
  8. पर-परागण में परागकण दूसरे फूल पर जाते हैं।
  9. कायिक प्रवर्धन में तने, जड़, या पत्तियों से पौधे बनते हैं।
  10. मुकुलन में मुकुल से नया पौधा बनता है।
  11. खंडन में पौधे का टूटा हिस्सा नया पौधा बनाता है।
  12. बीजाणु निर्माण में बीजाणुओं से पौधे बनते हैं।
  13. पुष्प पौधे का जनन अंग है।
  14. बाह्यदल फूल की कली को सुरक्षा देते हैं।
  15. पंखुड़ियाँ कीटों को आकर्षित करती हैं।
  16. पुंकेसर नर जनन अंग हैं।
  17. जायांग मादा जनन अंग है।
  18. जायांग में अंडाशय, वर्तिका, और वर्तिकाग्र होते हैं।
  19. परागण परागकणों का पुंकेसर से वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण है।
  20. हवा, पानी, कीट, और पक्षी परागण के एजेंट हैं।
  21. स्व-परागण मटर के पौधे में होता है।
  22. पर-परागण सूरजमुखी में होता है।
  23. पराग नलिका परागकण को अंडाशय तक ले जाती है।
  24. निषेचन में नर और मादा युग्मक मिलकर युग्मनज बनाते हैं।
  25. युग्मनज बीज में विकसित होता है।
  26. निषेचन से फल और बीज बनते हैं।
  27. बीज प्रकीर्णन बीजों को मातृ पौधे से दूर ले जाता है।
  28. हवा द्वारा प्रकीर्णन डैंडेलियन में होता है।
  29. पानी द्वारा प्रकीर्णन नारियल में होता है।
  30. जन्तुओं द्वारा प्रकीर्णन कॉकलेबर में होता है।
  31. विस्फोट द्वारा प्रकीर्णन भिण्डी में होता है।
  32. लैंगिक जनन सरसों के पौधे में होता है।
  33. अलैंगिक जनन आलू के कंद से होता है।
  34. पंखुड़ियाँ रंगीन होकर परागण में मदद करती हैं।
  35. बाह्यदल हरे रंग के होते हैं।
  36. पुंकेसर परागकण बनाते हैं।
  37. अंडाशय में अंडा होता है।
  38. परागण के बिना निषेचन नहीं हो सकता।
  39. पराग नलिका नर युग्मक को अंडाशय तक ले जाती है।
  40. फल बीजों को सुरक्षा देता है।
  41. बीजों में भ्रूण होता है।
  42. कायिक प्रवर्धन गुलाब में तने से होता है।
  43. मुकुलन यीस्ट में देखा जाता है।
  44. शैवाल में खंडन होता है।
  45. फर्न में बीजाणु निर्माण होता है।
  46. हवा हल्के बीजों को ले जाती है।
  47. नारियल के बीज पानी में तैरते हैं।
  48. कॉकलेबर के बीज जन्तुओं से चिपकते हैं।
  49. भिण्डी के फल फटने से बीज बिखरते हैं।
  50. प्रकीर्णन से बीजों की भीड़ कम होती है।
  51. जनन पर्यावरणीय संतुलन में योगदान देता है।

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. पौधों में जनन का मुख्य उद्देश्य क्या है?





2. लैंगिक जनन में क्या शामिल होता है?





3. अलैंगिक जनन का उदाहरण क्या है?





4. स्व-परागण का उदाहरण कौन सा है?





5. पर-परागण का उदाहरण कौन सा है?





6. कायिक प्रवर्धन का उदाहरण क्या है?





7. मुकुलन का उदाहरण कौन सा है?





8. बीजाणु निर्माण का उदाहरण कौन सा है?





9. पुष्प का नर जनन अंग कौन सा है?





10. पुष्प का मादा जनन अंग कौन सा है?





11. बाह्यदल का कार्य क्या है?





12. पंखुड़ियाँ का कार्य क्या है?





13. परागण क्या है?





14. परागण का एक एजेंट कौन सा है?





15. पराग नलिका का कार्य क्या है?





16. निषेचन का परिणाम क्या है?





17. बीज प्रकीर्णन का उद्देश्य क्या है?





18. हवा द्वारा बीज प्रकीर्णन का उदाहरण क्या है?





19. पानी द्वारा बीज प्रकीर्णन का उदाहरण क्या है?





20. जन्तुओं द्वारा बीज प्रकीर्णन का उदाहरण क्या है?





21. विस्फोट द्वारा बीज प्रकीर्णन का उदाहरण क्या है?





22. लैंगिक जनन का लाभ क्या है?





23. अलैंगिक जनन का लाभ क्या है?





24. जायांग में क्या होता है?





25. परागण के लिए हवा का उदाहरण कौन सा है?





26. पानी द्वारा परागण का उदाहरण क्या है?





27. युग्मनज क्या बनाता है?





28. खंडन का उदाहरण कौन सा है?





29. फल का कार्य क्या है?





30. बीजों में क्या होता है?