अशोक ने लुम्बिनी में उपज का आठवाँ भाग कर के रूप में लेने की घोषणा रुम्मिन देई
अभिलेख में की थी।
हड़प्पा सभ्यता का धौलावीरा पुरास्थल गुजरात में स्थित है।
सारनाथ स्तूप का निर्माण सम्राट अशोक ने कराया था।
महात्मा बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ में दिया था।
रामायण के रचनाकार महर्षि वाल्मीकि थे।
महाभारत के रचनाकार महर्षि वेदव्यास थे।
अर्थशास्त्र ग्रंथ की रचना कौटिल्य (चाणक्य) ने की थी।
राजतरंगिणी ग्रंथ के लेखक कल्हण थे।
इंडिका नामक पुस्तक मेगस्थनीज द्वारा लिखी गई थी।
चीनी यात्री ह्वेनसांग हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आया था।
B.C. का पूर्ण रूप बिफोर क्राइस्ट है।
A.D. का पूर्ण रूप एनो डोमिनी है।
विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य महाभारत है।
विश्व का सबसे बड़ा संग्रहालय लंदन का ब्रिटिश म्यूजियम है।
भारतीय पुरातत्व विभाग का जनक अलेक्जेंडर कनिंघम को माना जाता है।
पाषाणकाल को मानवशास्त्रियों ने पुरापाषाण, मध्यपाषाण और नवपाषाण—तीन भागों
में बाँटा है।
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले की गुफाओं से मानव के समूह में रहने के
प्रमाण मिले हैं।
पुरापाषाण काल के पत्थर के औजार बेडौल और भद्दी आकृति के थे।
आग की खोज पुरापाषाण काल की महान उपलब्धि मानी जाती है।
मानव का प्रथम पालतू पशु कुत्ता था।
मध्यपाषाण काल में मानव भोजन संग्राहक बन गया था।
नवपाषाण काल में मानव भोजन संग्राहक से उत्पादक बना।
नवपाषाण काल के प्रमुख औजार हत्थेदार कुल्हाड़ी, कुल्हाड़ी और हंसिया थे।
पहिए का आविष्कार नवपाषाण काल में हुआ था।
सबसे पहले प्रयोग की गई धातु ताँबा थी।
काँसा ताँबा और टिन का मिश्रण होता है।
हड़प्पा सभ्यता का काल लगभग 2500 ईसा पूर्व से 1520 ईसा पूर्व माना जाता है।
हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख स्थल पंजाब और सिंध क्षेत्र में पाए गए हैं।
हड़प्पा सभ्यता एक नगरीय सभ्यता थी।
मोहनजोदड़ो का शाब्दिक अर्थ मृतकों का टीला है।
रोपड़ पुरास्थल पंजाब राज्य में स्थित है।
कालीबंगा पुरास्थल राजस्थान राज्य में स्थित है।
लोथल पुरास्थल गुजरात राज्य में स्थित है।
दाइमाबाद पुरास्थल महाराष्ट्र राज्य में स्थित है।
एक विशाल पक्का स्नानागार मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुआ है।
मनका बनाने का कारखाना चन्हूदड़ो से प्राप्त हुआ है।
एक वस्तु के बदले दूसरी वस्तु के लेन-देन को वस्तु विनिमय कहा जाता है।
हड़प्पा सभ्यता को आद्य ऐतिहासिक युग के अंतर्गत रखा जाता है।
नगर निर्माण कला का विकास हड़प्पा सभ्यता की विशिष्ट देन माना जाता है।
सिंधु घाटी की सभ्यता एक नगरीय सभ्यता थी।
मोहनजोदड़ो के नगर एक निश्चित योजना के अनुसार बसे थे।
काँसे की बनी नर्तकी की मूर्ति मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुई है।
हड़प्पा के लोगों का विदेश व्यापार इराक के साथ होता था।
मैसोपोटामिया की सभ्यता दजला और फरात नदियों के किनारे विकसित हुई।
मैसोपोटामिया सभ्यता की लिपि चित्रात्मक लिपि थी।
मिश्र की सभ्यता को नील नदी का वरदान कहा जाता है।
क्रीट सभ्यता भूमध्य सागर के किनारे विकसित हुई थी।
क्रीट सभ्यता को द्वीप सभ्यता भी कहा जाता है।
चीन की सभ्यता ह्वांगहो (पीली नदी) के किनारे विकसित हुई।
कागज का आविष्कार सर्वप्रथम चीन में हुआ था।
आर्य शब्द का अर्थ श्रेष्ठ अथवा उत्तम होता है।
वेद शब्द संस्कृत भाषा के ‘विद्’ धातु से बना है।
वेदों की कुल संख्या चार है।
चारों वेदों के नाम ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद हैं।
सबसे प्राचीन वेद ऋग्वेद है।
प्रसिद्ध गायत्री मंत्र ऋग्वेद से लिया गया है।
संगीत से संबंधित वेद सामवेद है।
यज्ञों और कर्मकांडों से संबंधित वेद यजुर्वेद है।
तंत्र-मंत्र और जादू-टोने से संबंधित वेद अथर्ववेद है।
ऋग्वेद में कुल 10 मंडल हैं।
वैदिक काल में कबीलों को विश कहा जाता था।
वैदिक काल में राजा पर नियंत्रण रखने वाली संस्थाएँ सभा और समिति थीं।
वैदिक काल में कई ग्राम मिलकर विश का निर्माण करते थे।
राजा जन के लोगों से जो उपहार लेता था, उसे बलि कहा जाता था।
‘दधि’ शब्द का अर्थ दही होता है।
‘नवनीत’ शब्द का अर्थ मक्खन होता है।
‘शूत’ शब्द का अर्थ रथी होता है।
‘यव’ शब्द का अर्थ जौ होता है।
‘गोधूम’ शब्द का अर्थ गेहूँ होता है।
‘व्रीहि’ शब्द का अर्थ चावल होता है।
आर्यों ने जीवन को चार आश्रमों में बाँटा था।
चार आश्रम ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास थे।
वेदों में ‘अध्न्या’ शब्द गाय के लिए प्रयुक्त हुआ है।
‘अध्न्या’ का शाब्दिक अर्थ जिसका वध न किया जाए होता है।
रामायण की रचना महर्षि वाल्मीकि ने की थी।
महाभारत की रचना महर्षि वेदव्यास ने की थी।
महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना संस्कृत भाषा में की थी।
लोहे की खोज उत्तर वैदिक काल में हुई थी।
उपनिषदों की कुल संख्या 108 मानी जाती है।
‘सत्यमेव जयते’ मुण्डकोपनिषद से लिया गया है।
आर्यों की भाषा संस्कृत थी।
‘उपनिषद’ का शाब्दिक अर्थ पास बैठना होता है।
जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी थे।
महावीर स्वामी के बचपन का नाम वर्धमान था।
जैन धर्म के संस्थापक एवं प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव माने जाते हैं।
महावीर स्वामी ने अपने सिद्धांतों का प्रचार प्राकृत भाषा में किया।
‘कैवल्य’ का अर्थ जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति होता है।
महावीर स्वामी ने पाँच महाव्रतों का पालन करने पर बल दिया।
जैन धर्म के दो संप्रदाय हैं — श्वेतांबर और दिगंबर।
बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध थे।
महात्मा बुद्ध का जन्म लुम्बिनी में हुआ था, जो कपिलवस्तु के निकट नेपाल में
स्थित है।
गौतम बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था।
महात्मा बुद्ध ने दुःख से मुक्ति का मार्ग निर्वाण को बताया।
महात्मा बुद्ध के उपदेश पाली भाषा में थे।
बौद्ध धर्म के अनुयायी दो संप्रदायों — हीनयान और महायान — में बँट गए।
‘जनपद’ का शाब्दिक अर्थ जन के बसने का स्थान होता है।
बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय में 16 महाजनपदों का उल्लेख मिलता है।
नंद वंश का अंतिम शासक घनानंद था।
सिकंदर को भारत पर आक्रमण के लिए तक्षशिला के राजा आम्भी ने आमंत्रित किया
था।
पुरु का राज्य झेलम और रावी नदियों के बीच स्थित था।
सिकंदर मेसिडोनिया (यूनान) का राजा था।
सिकन्दर ने भारत पर आक्रमण 326 ईसा पूर्व में किया था।
आचार्य कौटिल्य ने चन्द्रगुप्त को राजकीलकम खेलते हुए देखा था।
मगध में मौर्य वंश की स्थापना 322 ईसा पूर्व में हुई थी।
मौर्य वंश की स्थापना चन्द्रगुप्त मौर्य ने की थी।
सिकन्दर के सेनापति का नाम सेल्यूकस निकेटर था।
महाजनपद काल में राजा का प्रमुख रक्षक सेनापति होता था।
राज्य की सीमा का अत्यधिक विस्तार कर लेने वाले राज्य को साम्राज्य कहा जाता
है।
सोलह महाजनपदों में सबसे शक्तिशाली जनपद मगध था।
अशोक मौर्य वंश का शासक था।
मौर्य वंश की स्थापना का काल 322 ईसा पूर्व माना जाता है।
सेल्यूकस ने चन्द्रगुप्त के दरबार में मेगस्थनीज को राजदूत के रूप में भेजा
था।
यूनानी लेखकों ने चन्द्रगुप्त मौर्य को सैन्ड्रोकोट्टस कहा है।
‘इंडिका’ पुस्तक के लेखक मेगस्थनीज थे।
‘अर्थशास्त्र’ पुस्तक के लेखक कौटिल्य (चाणक्य) थे।
चन्द्रगुप्त मौर्य के बाद मगध की राजगद्दी पर बिन्दुसार बैठा।
बिन्दुसार के बाद मगध की राजगद्दी पर अशोक बैठा।
धर्म को पाली भाषा में धम्म कहा जाता है।
अशोक ने अपने पुत्र महेन्द्र और पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका में धर्म
प्रचार के लिए भेजा।
साँची का स्तूप मध्य प्रदेश में स्थित है।
साँची के स्तूप का निर्माण सम्राट अशोक ने कराया था।
प्रथम बौद्ध संगीति अजातशत्रु के शासनकाल में हुई थी।
द्वितीय बौद्ध संगीति कालाशोक के शासनकाल में हुई थी।
तृतीय बौद्ध संगीति सम्राट अशोक के शासनकाल में हुई थी।
चतुर्थ बौद्ध संगीति कनिष्क प्रथम के शासनकाल में हुई थी।
मौर्य वंश का अंतिम शासक बृहद्रथ था।
हमारा राज चिन्ह अशोक की लाट है ।
कलिंग का युद्ध सम्राट अशोक और कलिंग राज्य के बीच लड़ा गया था।
शुंग वंश का संस्थापक पुष्यमित्र शुंग था।
शुंग वंश का अंतिम शासक देवभूति था।
कण्व वंश का संस्थापक वासुदेव था।
कण्व वंश का अंतिम शासक सुशर्मन था।
सातवाहन वंश का संस्थापक सिमुक था।
सातवाहन वंश का काल लगभग 30 ईसा पूर्व से 203 ईस्वी तक माना जाता है।
चैत्य बौद्ध धर्म के प्रार्थना स्थल होते थे।
कार्ले का चैत्य मंडप सातवाहन काल में निर्मित हुआ था।
78 ईस्वी में शक संवत कनिष्क प्रथम द्वारा प्रारंभ किया गया।
चतुर्थ बौद्ध संगीति कनिष्क प्रथम के समय आयोजित हुई थी।
‘चरक संहिता’ नामक ग्रंथ की रचना चरक ने की थी।
गांधार मूर्ति शैली में स्लेटी पत्थर का प्रयोग किया जाता था।
मथुरा मूर्ति शैली में लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग किया जाता था।
‘शाहानुशाही’ की अवधारणा कुषाण शासकों की देन मानी जाती है।
भारत में सबसे पहले सोने के सिक्के कुषाण शासक विम कडफिसेस ने जारी किए थे।
बौद्ध धर्म दो संप्रदायों—हीनयान और महायान—में कुषाण काल में विभाजित हुआ।
दिल्ली के मेहरौली स्थित लौह स्तंभ पर चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य)
की विजयों का वर्णन है।
गुप्त काल को भारत का स्वर्णकाल कहा जाता है।
गुप्त वंश का संस्थापक श्रीगुप्त था।
चन्द्रगुप्त प्रथम ने लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह किया था।
चन्द्रगुप्त प्रथम ने महाराजाधिराज की उपाधि धारण की।
गुप्त संवत् का आरंभ चन्द्रगुप्त प्रथम ने किया था।
चन्द्रगुप्त प्रथम का पुत्र समुद्रगुप्त था।
पश्चिमी इतिहासकारों ने समुद्रगुप्त की तुलना नेपोलियन से
की है।
‘प्रयाग प्रशस्ति’ में समुद्रगुप्त की विजयों का वर्णन है।
‘प्रयाग प्रशस्ति’ की रचना हरिषेण ने की थी।
‘विक्रमादित्य’ की उपाधि चन्द्रगुप्त द्वितीय ने धारण की थी।
गुप्त काल में सुदर्शन झील का पुनर्निर्माण स्कन्दगुप्त के
समय हुआ था।
गुप्त काल में मंत्रिपरिषद के सदस्यों को अमात्य कहा जाता था।
गुप्त प्रशासन की सबसे छोटी इकाई ग्राम थी।
गुप्त काल में भूमि कर कुल उपज का छठा भाग (भाग) लिया जाता था।
गुप्त शासक वैष्णव धर्म के अनुयायी थे।
गुप्त शासकों का राजकीय चिन्ह गरुड़ था।
दशावतार मंदिर देवगढ़ (उत्तर प्रदेश) में स्थित है।
अजंता की प्रसिद्ध गुफाएँ महाराष्ट्र में स्थित हैं।
गुप्त काल में साम्राज्य विभाजन का क्रम भुक्ति → विषय → ग्राम था।
कालिदास की प्रमुख रचनाएँ रघुवंश, कुमारसंभव, मेघदूत, अभिज्ञानशाकुन्तलम्
हैं।
‘मृच्छकटिकम्’ नाटक की रचना शूद्रक ने की थी।
‘मुद्राराक्षस’ नाटक विशाखदत्त द्वारा लिखा गया था।
भारत का प्रथम कृत्रिम उपग्रह आर्यभट था।
आर्यभट का संबंध गुप्त काल से था।
वराहमिहिर प्रथम व्यक्ति जिन्होंने कहा कि कोई शक्ति ऐसी है जो चीजों को जमीन के साथ
चिपकाये रहती हैं।
विदेशी यात्री फाह्यान चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के शासनकाल में
भारत आया था।
गुप्त वंश का अंतिम शासक बुद्धगुप्त माना जाता है।
गुप्त काल में प्रांत के प्रमुख को उपरिक कहा जाता था।
गुप्त संवत् का प्रारंभ 319–320 ईस्वी से माना जाता है।
पुष्यभूति (वर्धन) वंश का प्रथम शासक प्रभाकर वर्धन था।
प्रभाकर वर्धन के दो पुत्र—राज्यवर्धन और हर्षवर्धन—थे।
प्रभाकर वर्धन की पुत्री का नाम राज्यश्री था।
हर्षवर्धन (606–647 ई.) की प्रारंभिक राजधानी थानेश्वर थी।
हर्षवर्धन ने अपनी राजधानी कन्नौज को बनाया।
हर्षवर्धन द्वारा संस्कृत में लिखे गए तीन नाटक नागानन्द, रत्नावली और
प्रियदर्शिका हैं।
हर्षवर्धन के दरबारी कवि बाणभट्ट थे।
‘हर्षचरित’ ग्रंथ के रचयिता बाणभट्ट हैं।
चीनी यात्री ह्वेनसांग (श्वेनत्सांग) हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आया था।
हर्षवर्धन की मृत्यु 647 ईस्वी में हुई थी।
‘राजपूत’ शब्द संस्कृत के राजपुत्र शब्द का बिगड़ा हुआ रूप है।
प्रतिहार वंश के शासक उज्जैन में शासन करते थे।
गहड़वाल वंश के शासक कन्नौज में शासन करते थे।
चौहान वंश के शासक अजमेर और दिल्ली क्षेत्र में शासन करते थे।
चंदेल वंश के शासक बुंदेलखंड क्षेत्र में शासन करते थे।
परमार वंश के शासक मालवा क्षेत्र में शासन करते थे।
पाल वंश के शासक बंगाल क्षेत्र में शासन करते थे।
प्रतिहार वंश का सबसे शक्तिशाली शासक नागभट्ट द्वितीय था।
गहड़वाल वंश के संस्थापक चन्द्रदेव (1080 ई० -1085 ई० ) थे।
प्रतिहार वंश के अंतिम शासक महेंद्रपाल थे ।
गहड़वाल वंश का अंतिम शासक जयचंद था।
जयचंद और मुहम्मद गोरी के बीच चंदावर का युद्ध हुआ था।
चंदावर का युद्ध 1194 ईस्वी में लड़ा गया था।
चौहान वंश की स्थापना वासुदेव ने की थी।
चौहान वंश के सबसे प्रतापी शासक पृथ्वीराज चौहान थे।
तराइन का प्रथम युद्ध 1191 ईस्वी में हुआ था।
तराइन का प्रथम युद्ध पृथ्वीराज चौहान और मुहम्मद गोरी के बीच हुआ था।
चंदेल वंश के संस्थापक नन्नुक थे।
विश्व प्रसिद्ध खजुराहो मंदिरों का निर्माण चंदेल शासकों ने कराया था।
खजुराहो मध्य प्रदेश राज्य में स्थित है।
परमार वंश की स्थापना उपेन्द्र ने की थी।
अलाउद्दीन खिलजी ने 1305 ईस्वी में मालवा पर विजय प्राप्त की।
पाल वंश की स्थापना बंगाल में गोपाल ने की थी।
‘विक्रमशिला’ विश्वविद्यालय की स्थापना धर्मपाल ने की थी।
पाल वंश का अंतिम शासक मदनपाल माना जाता है।
पाल वंश का सबसे शक्तिशाली शासक धर्मपाल था।
लिंगराज मंदिर भुवनेश्वर (ओडिशा) में स्थित है।
कोणार्क का सूर्य मंदिर गंग वंश के शासक नरसिंहदेव प्रथम द्वारा बनवाया गया
था।
‘बाल रामायण’ के रचयिता राजशेखर थे।
‘किरातार्जुनीयम्’ के रचयिता भारवि थे।
‘शिशुपाल वध’ के रचयिता माघ थे।
‘राजतरंगिणी’ के रचयिता कल्हण थे।
‘गीत गोविन्द’ के रचयिता जयदेव थे।
‘पृथ्वीराज रासो’ के रचयिता चंदबरदाई थे।
सेन वंश की स्थापना सामंत सेन ने की थी।
राष्ट्रकूट वंश का प्रथम शासक दन्तिदुर्ग था।
राष्ट्रकूट वंश की राजधानी मान्यखेट थी।
एलोरा का प्रसिद्ध कैलाश मंदिर राष्ट्रकूट शासक कृष्ण प्रथम ने बनवाया।
चालुक्य वंश का संस्थापक पुलिकेशिन प्रथम था।
चालुक्य वंश की राजधानी वातापी (बादामी) थी।
विरुपाक्ष मंदिर वातापी , बागलकोट , (कर्नाटक) में स्थित है।
पल्लव वंश का संस्थापक सिंह विष्णु था।
पल्लव शासकों ने अपनी राजधानी कांची बनाई।
महाबलिपुरम में बने रथ मंदिर को पल्लव वंश के शासकों ने बनवाया।
चोल वंश के शासकों ने तंजौर को अपनी राजधानी बनाया।
किस चोल शासक ने सम्पूर्ण श्रीलंका को जीत लिया था: राजेन्द्र प्रथम।
चोल काल में प्रांतों को मण्डलम कहा जाता था।
चोलकाल में जनपद को नाडु कहा जाता था।
चोलकाल में गाँव को कुर्रम कहा जाता था।
बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण चोल राजाओं (विशेषकर राजराज प्रथम) ने कराया।
बृहदेश्वर मंदिर तंजौर (तमिलनाडु) में स्थित है।
महान संस्कृत कवि दण्डी पल्लव राजा नरसिंह वरमन द्वितीय की राजसभा में थे।
दक्षिण भारत में लोकप्रिय 'रामायणम्' कम्बन ने लिखी ।
अंकोरवाट का मंदिर कम्बोडिया में स्थित है।
रामानुजाचार्य ने शक्ति और ज्ञान को ईश्वर प्राप्ति का साधन बताया।
मठों की स्थापना उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम क्षेत्रों में शंकराचार्य
ने
की।
संसार का सबसे विशाल बौद्ध मंदिर बोरोबुदुर (इंडोनेशिया) में स्थित है।
नटराज की सुंदर धातु मूर्ति वृहदेश्वर मंदिर (तंजावुर, तमिलनाडु) में
स्थापित
है।