भारत के उत्तर में विश्व का नवीनतम एवं सबसे ऊँचा पर्वत हिमालय स्थित है।
भारत में सर्वाधिक वर्षा मेघालय के मॉसिनराम में होती है।
भारत में लगभग 225 भाषाएँ बोली जाती हैं।
भारत में 22 भाषाएँ मुख्य भाषाओं के रूप में मान्यता प्राप्त हैं।
होली, दीपावली और दशहरा हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहार हैं।
ईद मुस्लिम धर्म का प्रमुख त्योहार है।
प्रकाश पर्व सिख धर्म का प्रमुख त्योहार है।
क्रिसमस ईसाई धर्म का प्रमुख त्योहार है।
बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध धर्म का प्रमुख त्योहार है।
महावीर जयंती जैन धर्म का प्रमुख त्योहार है।
नवरोज पारसी धर्म का प्रमुख त्योहार है।
वैसाखी पंजाब का प्रमुख त्योहार है।
ओणम केरल का प्रमुख त्योहार है।
पोंगल तमिलनाडु का प्रमुख त्योहार है।
मकर संक्रांति उत्तर भारत का प्रमुख त्योहार है।
कत्थक उत्तर प्रदेश का प्रमुख शास्त्रीय नृत्य है।
भरतनाट्यम तमिलनाडु का प्रमुख शास्त्रीय नृत्य है।
ओडिसी ओडिशा का प्रमुख शास्त्रीय नृत्य है।
कथकली केरल का प्रमुख शास्त्रीय नृत्य है।
कश्मीर में पहना जाने वाला फिरन सर्दी से बचाने वाला पारंपरिक वस्त्र है।
सचिन तेंदुलकर को भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से
सम्मानित किया गया।
बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम वर्ष 1986 में लागू किया गया।
बाल श्रम अधिनियम के तहत बाल मजदूरी को अपराध माना गया है।
14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से मजदूरी कराना बाल श्रम कहलाता है।
गरीबी और अशिक्षा बाल श्रम के मुख्य कारण हैं।
बालिका सुरक्षा का अर्थ बालिकाओं को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है।
कर्णम मल्लेश्वरी भारोत्तोलन से संबंधित प्रसिद्ध महिला खिलाड़ी हैं।
सानिया मिर्जा प्रसिद्ध बैडमिंटन खिलाड़ी नहीं, बल्कि प्रसिद्ध
टेनिस खिलाड़ी हैं।
झूलन गोस्वामी भारतीय महिला क्रिकेट खिलाड़ी हैं।
मिताली राज भारतीय महिला क्रिकेट की प्रसिद्ध खिलाड़ी हैं।
एम. एस. मैरी कॉम प्रसिद्ध महिला बॉक्सिंग खिलाड़ी हैं।
साइना नेहवाल प्रसिद्ध बैडमिंटन खिलाड़ी हैं।
पी. वी. सिंधु भारत की प्रसिद्ध बैडमिंटन खिलाड़ी हैं।
साक्षी मलिक फ्रीस्टाइल कुश्ती की प्रसिद्ध खिलाड़ी हैं।
मदर टेरेसा समाज सेवा के लिए प्रसिद्ध थीं।
मेधा पाटकर प्रसिद्ध समाज सेविका हैं।
कल्पना चावला भारतीय मूल की प्रसिद्ध अंतरिक्ष यात्री थीं।
सुनीता विलियम्स प्रसिद्ध अंतरिक्ष यात्री हैं।
इंदिरा गाँधी भारत की प्रसिद्ध महिला राजनीतिज्ञ थीं।
सरोजिनी नायडू भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनीतिज्ञ थीं।
सुचेता कृपलानी भारत की प्रमुख महिला राजनीतिज्ञ थीं।
विजयलक्ष्मी पंडित प्रसिद्ध भारतीय राजनीतिज्ञ और राजनयिक थीं।
प्रतिभा पाटिल भारत की पहली महिला राष्ट्रपति थीं।
भारत के राष्ट्रीय ध्वज में केसरिया, सफेद और हरा रंग होता है।
भारत के राष्ट्रीय ध्वज को तिरंगा कहा जाता है।
केसरिया रंग बलिदान और त्याग का प्रतीक है।
सफेद रंग शांति और सत्य का प्रतीक है।
हरा रंग हरियाली और समृद्धि का प्रतीक है।
राष्ट्रीय ध्वज के मध्य में नीले रंग का अशोक चक्र बना होता है।
अशोक चक्र में 24 तीलियाँ होती हैं।
अशोक चक्र निरंतर प्रगति और उन्नति का प्रतीक है।
राष्ट्रीय ध्वज की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 होता है।
रवीन्द्रनाथ टैगोर ने भारत के राष्ट्रगान की रचना की थी।
भारत के राष्ट्रगान के गायन की अवधि 52 सेकंड है।
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने ‘वंदे मातरम्’ गीत की रचना
की।
‘वंदे मातरम्’ गीत ‘आनंदमठ’ उपन्यास से लिया गया है।
भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ है।
प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत अप्रैल 1973 में की गई थी।
भारत का राष्ट्रीय पक्षी मोर है।
मादा मोर की अपेक्षा नर मोर अधिक सुंदर होता है।
भारत का राष्ट्रीय पुष्प कमल है।
भारत का राजचिह्न सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ से लिया गया है।
भारत के राजचिह्न में चार सिंह बने होते हैं।
शेरों के पैरों के नीचे एक पट्टी होती है, जिसके बीच में एक चक्र बना होता
है।
राजचिह्न के चक्र के दाईं ओर एक साँड़ तथा बाईं ओर एक
घोड़ा बना होता है।
स्तम्भ के नीचे देवनागरी लिपि में ‘सत्यमेव जयते’ लिखा है, जिसका अर्थ है —
‘सत्य की ही विजय होती है।’
‘सत्यमेव जयते’ शब्द ‘मुण्डक उपनिषद’ से लिया गया है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत दिसम्बर 2000 में
की गई थी।
महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) फरवरी
2006 में शुरू की गई।
मनरेगा योजना प्रत्येक परिवार के वयस्क सदस्य को वर्ष में कम से कम 100 दिन के
रोजगार की गारंटी देती है।
2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन का शुभारम्भ किया गया।
स्वच्छ भारत मिशन का स्लोगन “एक कदम स्वच्छता की ओर” है।
स्वशासन का अर्थ है — ‘अपना शासन’।
पंचायत व्यवस्था तीन स्तरों पर कार्य करती है — ग्राम पंचायत, क्षेत्र
पंचायत और जिला पंचायत।
कम से कम 1000 की आबादी पर एक ग्राम पंचायत होती है।
ग्राम पंचायत का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए।
ग्राम पंचायत सदस्यों की संख्या उस ग्राम सभा की कुल जनसंख्या के आधार पर
निर्धारित होती है।
ग्राम पंचायत सदस्यों की संख्या 9 से 15 तक हो सकती है।
1000 जनसंख्या वाली ग्राम सभा में ग्राम पंचायत के 9 सदस्य
होते हैं।
2000 जनसंख्या वाली ग्राम सभा में ग्राम पंचायत के 11
सदस्य होते हैं।
3000 जनसंख्या वाली ग्राम सभा में ग्राम पंचायत के 13
सदस्य होते हैं।
3000 से अधिक जनसंख्या वाली ग्राम सभा में ग्राम पंचायत के 15
सदस्य होते हैं।
ग्राम पंचायत के सदस्य 5 वर्ष के लिए चुने जाते हैं।
ग्राम पंचायत अधिकारी (सेक्रेटरी) ग्राम पंचायत का सचिव होता है।
वर्ष में दो बार ग्राम पंचायत की बैठक होती है।
ग्राम पंचायत का चुनाव प्रत्येक 5 वर्ष में कराया जाता है।
पंचायत सदस्यों को चुनने वाले मतदाता की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए।
ग्राम पंचायत के प्रधान को ग्राम प्रधान कहा जाता है।
पंचायत को सरकार द्वारा अनुदान प्राप्त होता है।
मेला, दुकान, मकान आदि पर लगाए गए कर से ग्राम पंचायत की आय होती है।
कई ग्राम पंचायतों को मिलाकर एक विकास खण्ड बनता है, जिसे विकास
क्षेत्र भी कहते हैं।
क्षेत्र पंचायत के सदस्यों को B.D.C. सदस्य भी कहा जाता है।
क्षेत्र पंचायत के सभी सदस्य अपने बीच से एक ब्लॉक प्रमुख का चुनाव करते
हैं।
क्षेत्र पंचायत का सदस्य बनने के
लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए।
क्षेत्र पंचायत के सभी सदस्य 5 वर्ष के लिए चुने जाते हैं।
खण्ड विकास अधिकारी (BDO) क्षेत्र पंचायत का सचिव होता है।
जिले की सभी क्षेत्र पंचायतों को मिलाकर जिला पंचायत बनती है।
जिला पंचायत का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए।
जिले के सांसद और विधायक जिला पंचायत के सदस्य होते हैं।
क्षेत्र पंचायत के सभी ब्लॉक प्रमुख जिला पंचायत के सदस्य होते हैं।
सांसद और विधायक क्षेत्र पंचायत के सदस्य भी होते हैं।
उत्तर प्रदेश में 16 नगर निगम, 125 नगरपालिका परिषद एवं
438 नगर पंचायतें हैं।
5 हजार से 1 लाख तक की जनसंख्या वाले नगरों में नगर पंचायत
का गठन किया जाता है।
प्रत्येक नगर पंचायत में एक अध्यक्ष होता है।
नगरों को छोटे-छोटे भागों में बाँटा जाता है, जिन्हें वार्ड कहते हैं।
एक नगर पंचायत में 10 से 24 वार्ड होते हैं।
जिन नगरों की जनसंख्या 1 लाख से 5 लाख तक होती है, वहाँ नगरपालिका
परिषद होती है।
नगरपालिका परिषद में 25 से 55 वार्ड होते हैं।
प्रत्येक वार्ड से एक सदस्य चुना जाता है, जिसे वार्ड सदस्य या
पार्षद कहते हैं।
नगरपालिका परिषद में एक अध्यक्ष तथा एक उपाध्यक्ष होता है।
नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष का चुनाव जनता द्वारा सीधे किया जाता है।
नगरपालिका परिषद के उपाध्यक्ष का चुनाव निर्वाचित पार्षदों द्वारा किया जाता है।
जिन नगरों की जनसंख्या 5 लाख से अधिक होती है, वहाँ नगर
निगम का गठन किया जाता है।
नगर निगम में चुने हुए सदस्यों की संख्या 60 से 110 तक होती है।
नगर निगम के अध्यक्ष को महापौर या मेयर कहा जाता है।
प्रत्येक नगर निगम में एक मुख्य प्रशासनिक अधिकारी होता है, जिसे नगर आयुक्त
कहते हैं।
नगर पंचायत, नगरपालिका परिषद तथा नगर निगम का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।
नगर पंचायत, नगरपालिका परिषद तथा नगर निगम का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 21
वर्ष होती है।
नगर पंचायत, नगरपालिका परिषद तथा नगर निगम की आय के मुख्य स्रोत मकान कर, जल कर,
मनोरंजन कर एवं सरकारी अनुदान हैं।
नगर पंचायत, नगरपालिका परिषद और नगर निगम का मुख्य कार्य सड़कों, पानी और प्रकाश
व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
नगर निकाय शहर की साफ-सफाई करवाते हैं तथा कचरा उठवाने की
व्यवस्था करते हैं।
नगर निकाय बाजार एवं सब्जी मंडियों की सफाई की व्यवस्था
करते हैं।
नगर निकाय कांजी हाउस तथा आवारा पशुओं की देख-रेख की व्यवस्था करते हैं।
नगर निकाय शहर में होने वाले जन्म और मृत्यु का लेखा-जोखा रखते हैं।
नगर निकाय पुस्तकालय, पाठशाला, बाग-बगीचे और पार्क आदि का निर्माण करवाते
हैं।
5 हजार से 1 लाख जनसंख्या वाले नगरों में नगर पंचायत का
गठन होता है।
1 लाख से 5 लाख जनसंख्या वाले नगरों में नगरपालिका परिषद
का गठन होता है।
5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों में नगर निगम का गठन
किया जाता है।
नगर पंचायत, नगरपालिका परिषद और नगर निगम का कार्यकाल 5 वर्ष होता है।
नगर पंचायत में सदस्यों की संख्या 10 से 24 तक होती है।
नगरपालिका परिषद में सदस्यों की संख्या 25 से 55 तक होती है।
नगर निगम में सदस्यों की संख्या 60 से 110 तक होती है।
नगर निकाय का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए।
नगर पंचायत के प्रमुख पद को अध्यक्ष कहा जाता है।
नगरपालिका परिषद के निर्वाचित सदस्य को वार्ड सदस्य या
पार्षद कहा जाता है।
नगर निगम के प्रमुख पद को महापौर या मेयर कहा जाता है।
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं।
जिला प्रशासन का प्रमुख अधिकारी जिलाधिकारी होता है, जिसे डी.एम.
(DM) या कलेक्टर भी कहा जाता है।
जिले में विवादों पर निर्णय सुनाने और न्याय करने का कार्य जिला न्यायाधीश
करता है।
जिले में विकास योजनाएँ बनाना तथा उनकी देख-रेख करना मुख्य विकास अधिकारी
(CDO) का कार्य होता है।
जिले में परिवार कल्याण, टीकाकरण और बीमारियों की रोकथाम का कार्य मुख्य चिकित्सा
अधिकारी (CMO) करता है।
जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) जिले के माध्यमिक विद्यालयों की व्यवस्था
देखता है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) जिले के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों
की व्यवस्था देखता है।
जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने का कार्य पुलिस अधीक्षक (SP) का होता है।
उपजिलाधिकारी (SDM) भूमि व्यवस्था एवं लगान वसूली का कार्य करता है।
प्रत्येक जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए विभिन्न विभागीय अधिकारी
नियुक्त किए जाते हैं।
सड़क सुरक्षा का अर्थ उन उपायों और नियमों से है, जो पैदल यात्रियों, वाहन
चालकों तथा यात्रियों को दुर्घटनाओं से बचाते हैं।
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 134 के अनुसार दुर्घटना करने
वाले वाहन चालक का दायित्व है कि वह घायल व्यक्ति को डॉक्टर के पास पहुँचाए और पुलिस को सूचना दे।
डॉक्टर का कर्तव्य है कि वह बिना देरी किए घायल व्यक्ति का उपचार करे।
घायल व्यक्ति का इलाज न करने पर 3 महीने की कैद तथा जुर्माने का प्रावधान
है।
अधिकांश सड़क दुर्घटनाएँ लापरवाही और जल्दबाजी के कारण
होती हैं।
पैदल यात्रियों को सड़क पर सदैव अपनी बाईं ओर चलना चाहिए।
यदि फुटपाथ उपलब्ध हो तो पैदल यात्रियों को फुटपाथ का उपयोग करना चाहिए।
यदि फुटपाथ न हो तो सड़क के बाईं किनारे से चलना चाहिए।
सड़क पार करते समय पहले दाईं ओर, फिर बाईं ओर और उसके बाद
पुनः दाईं ओर देखना चाहिए।
सड़क पार करते समय आने वाले वाहनों की आवाज भी ध्यान से सुननी चाहिए।
जब कोई वाहन न आ रहा हो, तभी सावधानीपूर्वक सड़क पार करनी चाहिए।
चौराहा पार करते समय ट्रैफिक सिग्नल का पालन करना चाहिए।