इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मोहम्मद साहब थे।
हजरत मोहम्मद साहब का जन्म मक्का में हुआ था।
हजरत मोहम्मद साहब का जन्म 570 ईस्वी में हुआ था।
हिजरी संवत् का प्रारम्भ 622 ईस्वी से हुआ था।
इस्लाम में अपनी आय का 40वाँ भाग गरीबों को देना जकात कहलाता है।
भारत पर अरबों का पहला आक्रमण खलीफा उमर के समय हुआ था।
636 ईस्वी में अरबों का पहला आक्रमण थाना (पश्चिमी तट) पर हुआ था।
712 ईस्वी में मोहम्मद बिन कासिम ने सिंध के शशक राजा दाहिर को पराजित किया कर
सिंध पर अरबों का राज्य स्थापित किया ।
शतरंज के खेल की शुरुआत भारत में हुई थी।
महमूद गजनवी ने 1000 से 1025 ईस्वी के बीच 17 बार राजपूत राज्यों पर आक्रमण किया।
सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण महमूद गजनवी ने1025 ईस्वी में किया था।
अलबरूनी मध्य एशिया (ख्वारिज्म) का प्रसिद्ध विद्वान था।
अलबरूनी का मूल नाम अबू रैहान मोहम्मद बिन अहमद था।
‘तहकीक-ए-हिन्द’ पुस्तक के लेखक अलबरूनी थे।
मुहम्मद गौरी को गुजरात में चालुक्य शासक मूलराज द्वितीय ने पराजित किया था।
तराइन का प्रथम युद्ध 1191 ईस्वी में हुआ था।
तराइन का प्रथम युद्ध पृथ्वीराज चौहान और मुहम्मद गौरी के बीच हुआ था।
तराइन का द्वितीय युद्ध 1192 ईस्वी में हुआ था।
मुहम्मद गौरी की मृत्यु 1206 ईस्वी में हुई थी।
मुहम्मद साहब का मक्का छोड़कर मदीना जाना हिजरत कहलाता है।
कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपनी राजधानी लाहौर में बनाई थी।
कुतुबुद्दीन ऐबक लाखबख्श के नाम से प्रसिद्ध था।
कुतुब मीनार के निर्माण की शुरुआत कुतुबुद्दीन ऐबक ने की थी।
कुतुब-उल-इस्लाम मस्जिद का निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने कराया था।
अजमेर में ‘अढ़ाई दिन का झोपड़ा’ का निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने कराया था।
कुतुब मीनार दिल्ली में स्थित है।
कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु 1210 ईस्वी में चौगान खेलते समय घोड़े
से गिरने से हुई थी।
दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक इल्तुतमिश को माना जाता है।
चालीस तुर्क गुलाम सरदारों का संगठन (तुर्कान-ए-चेहलगानी)
इल्तुतमिश ने बनाया था।
कुतुब मीनार का निर्माण पूर्ण इल्तुतमिश ने कराया था।
इक्ता व्यवस्था द्वारा केन्द्र को प्रान्तीय एवं स्थानीय शासन से जोड़ने की नींव
इल्तुतमिश ने डाली थी।
इक्ता (प्रान्त) का प्रधान अधिकारी इक्तादार कहलाता था।
मुद्रा व्यवस्था में सुधार करते हुए चाँदी का टंका और ताँबे का
जीतल इल्तुतमिश ने चलाया था।
मध्यकालीन विश्व की पहली मुस्लिम महिला शासक रज़िया सुल्तान थीं।
रज़िया सुल्तान 1236 ईस्वी में दिल्ली की गद्दी पर बैठीं।
इल्तुतमिश के पौत्र नासिरुद्दीन महमूद 1246 ईस्वी में दिल्ली की
गद्दी पर बैठे थे।
सिजदा एवं पाबोस परम्परा की शुरुआत गयासुद्दीन बलबन ने की थी।
1265 ईस्वी में दिल्ली की गद्दी पर बलबन बैठे थे।
सिजदा का तात्पर्य सुल्तान के सामने घुटनों के बल बैठकर सुल्तान के सामने सिर झुकाना था।
पायबोस का अर्थ सुल्तान के चरणों को चूमना था।
इल्तुतमिश ने रज़िया सुल्तान को अपना उत्तराधिकारी बनाया था।
खिलजी वंश की स्थापना जलालुद्दीन फिरोज खिलजी (1290 ) ने की थी।
जलालुद्दीन फिरोज खिलजी की हत्या अलाउद्दीन खिलजी ने की थी।
1296 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली की गद्दी पर बैठे थे।
अलाउद्दीन खिलजी के प्रमुख सेनापति मलिक काफूर थे।
मलिक काफूर अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति थे।
मलिक काफूर ने दक्षिण भारत के देवगिरि, तेलंगाना और होयसल राज्यों पर विजय प्राप्त
की थी।
अलाउद्दीन खिलजी ने भूमि माप के लिए बिस्वा इकाई का प्रयोग किया।
बाज़ार व्यवस्था के लिए अलाउद्दीन खिलजी ने कुशल एवं ईमानदार अधिकारियों की नियुक्ति की, जिनका
प्रमुख शहना-ए-मंडी कहलाता था।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली की शुरुआत अलाउद्दीन खिलजी ने की थी।
प्रसिद्ध विद्वान अमीर खुसरो और जियाउद्दीन बरनी अलाउद्दीन खिलजी
के दरबार में रहते थे।
दिल्ली में ‘हज़ार खम्भा महल’ का निर्माण अलाउद्दीन खिलजी ने कराया था।
दिल्ली में अलाई दरवाज़ा का निर्माण अलाउद्दीन खिलजी ने करवाया
था।
खिलजी वंश का अंतिम शासक मुबारक शाह खिलजी था।
तुगलक वंश का शासनकाल 1320 ईस्वी से 1412 ईस्वी तक माना जाता है।
तुगलक वंश की स्थापना गयासुद्दीन तुगलक ने की थी।
गयासुद्दीन तुगलक की मृत्यु के बाद मुहम्मद बिन तुगलक दिल्ली का सुल्तान बना।
मुहम्मद बिन तुगलक का बचपन का नाम जौना खाँ था।
1325 ईस्वी में मुहम्मद बिन तुगलक दिल्ली का सुल्तान बना।
मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में मोरक्को का यात्री इब्न बतूता
भारत आया।
इब्न बतूता की भारत यात्रा का वर्णन ‘रेहला’ नामक पुस्तक में मिलता है।
मुहम्मद बिन तुगलक ने दिल्ली के स्थान पर देवगिरि (दौलताबाद) को द्वितीय राजधानी
बनाया।
मुहम्मद बिन तुगलक ने चाँदी के स्थान पर ताँबे और पीतल के मिश्रित धातु के सिक्के
चलाए।
1351 ईस्वी में मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु हुई।
मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु के बाद फिरोजशाह तुगलक दिल्ली का सुल्तान बना।
यमुना नहर और सतलज नहर का निर्माण फिरोजशाह तुगलक ने कराया था।
जौनपुर नगर की स्थापना फिरोजशाह तुगलक ने की थी।
फिरोजपुर नगर की स्थापना फिरोजशाह तुगलक ने की थी।
फिरोजाबाद नगर की स्थापना फिरोजशाह तुगलक ने की थी।
बेरोजगार लोगों को नौकरी देने हेतु पहला रोजगार कार्यालय फिरोजशाह
तुगलक ने स्थापित किया।
तुगलक वंश का अंतिम शासक नासिरुद्दीन महमूद था।
फिरोजशाह कोटला में स्थित अशोक स्तम्भ की ब्राह्मी लिपि को सर्वप्रथम जेम्स
प्रिंसेप ने पढ़ा था।
जिस स्थान पर मुद्रा ढाली जाती है उसे टकसाल कहा जाता है।
तैमूर ने 1398 ईस्वी में दिल्ली पर आक्रमण किया था।
तैमूर की राजधानी समरकन्द थी।
सैय्यद वंश का संस्थापक खिज्र खाँ (1414-1451) था।
खिज्र खाँ ने रैयत-ए-आला की उपाधि धारण की थी।
दिल्ली सल्तनत का अंतिम राजवंश लोदी वंश (1451-1489) था।
लोदी वंश की स्थापना बहलोल लोदी ने की थी।
आगरा नगर की स्थापना सिकन्दर लोदी ने की थी।
बहलोल लोदी के बाद उसका पुत्र निजाम खाँ सिकन्दर शाह के नाम से
दिल्ली की गद्दी पर बैठा।
सिकन्दर लोदी ‘गुलरुखि' उपनाम से कविता लिखा करता था।
भूमि माप के लिए सिकन्दर लोदी ने गज-ए-सिकन्दरी पैमाने की शुरुआत की।
गज-ए-सिकन्दरी की लंबाई लगभग 30 इंच होती थी।
सिकन्दर लोदी का पुत्र इब्राहिम लोदी था।
बाबर काबुल का शासक था।
पानीपत का प्रथम युद्ध बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच हुआ था।
पानीपत का प्रथम युद्ध 1526 ईस्वी में लड़ा गया था।
आगरा नगर की स्थापना 1504 ईस्वी में सिकन्दर लोदी ने की थी।
पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी की हार हुई थी।
सल्तनत काल में सेना का सबसे बड़ा अधिकारी सुल्तान होता था।
सल्तनत काल में शिक का अधिकारी शिकदार कहलाता था।
सल्तनत काल में भू-राजस्व अधिकारी को आमिल कहा जाता था।
सल्तनत काल में शिक का कोषाध्यक्ष फोतदार कहलाता था।
प्रशासन की सबसे छोटी इकाई गाँव होती थी।
गाँव के मुखिया को मुकद्दम या चौधरी कहा जाता था।
कबीरदास की प्रमुख रचनाएँ साखी, सबद और रमैनी हैं।
कबीरदास निरंकार ईश्वर में विश्वास करते थे।
मीराबाई राणा रतन सिंह की पुत्री थीं।
मीराबाई कृष्ण की उपासना में भजन गाया करती थीं।
गुरु नानक देव का जन्म 1469 ईस्वी में तलवंडी (पंजाब) में हुआ
था।
गुरु नानक देव ने सिख धर्म की स्थापना की।
सूफी संत ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह अजमेर में स्थित है।
सूफी संत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह दिल्ली में स्थित है।
अमीर खुसरो फारसी साहित्य के महान विद्वान थे।
‘बीसलदेव रासो’ और ‘खुमान रासो’ के रचयिता नरपति नाल्ह थे।
महाकाव्य ‘पद्मावत’ की रचना मलिक मुहम्मद जायसी ने की थी।
महाकाव्य ‘पद्मावत’ अवधी भाषा में लिखा गया था।
‘पद्मावत’ के नायक चित्तौड़ के राजा रतन सिंह तथा नायिका
पद्मावती थीं।
‘तारीख-ए-फिरोजशाही’ के लेखक जियाउद्दीन बरनी थे।
मच्छेन्द्र एक प्रसिद्ध वैद्य थे।
जोग एक शल्य चिकित्सा (सर्जरी) में निपुण थे।
सल्तनतकालीन इमारतों की प्रमुख विशेषताएँ मेहराब, गुम्बद और मीनार थीं।
सल्तनत काल में गया, सौराष्ट्र और वाराणसी की तलवारें प्रसिद्ध थीं।
सल्तनत काल में सियालकोट की तोड़दार बंदूकें प्रसिद्ध थीं।
बहमनी राज्य की नींव हसन गंगू ने 1347 ईस्वी में डाली थी।
हसन गंगू ने अलाउद्दीन बहमन शाह की उपाधि धारण की थी।
हसन गंगू ने अपनी राजधानी गुलबर्गा को बनाया था।
विजयनगर साम्राज्य की स्थापना हरिहर और बुक्का ने की थी।
विजयनगर साम्राज्य की राजधानी विजयनगर (हम्पी) थी।
कृष्णदेव राय विजयनगर साम्राज्य के महान शासक थे।
बाबर का शासनकाल 1526 ईस्वी से 1530 ईस्वी तक रहा।
बाबर के पिता का नाम उमर शेख मिर्जा था।
उमर शेख मिर्जा फरगना का शासक था।
पानीपत का प्रथम युद्ध 21 अप्रैल 1526 ईस्वी को हुआ था।
पानीपत का प्रथम युद्ध बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच हुआ था।
खानवा का युद्ध 1527 ईस्वी में लड़ा गया था।
खानवा का युद्ध बाबर और राणा सांगा के बीच हुआ था।
चन्देरी का युद्ध 1528 ईस्वी में हुआ था।
चन्देरी का युद्ध बाबर और मेदिनीराय के बीच हुआ था।
घाघरा का युद्ध 1529 ईस्वी में लड़ा गया था।
घाघरा का युद्ध बाबर और अफगानों के बीच हुआ था।
बाबर की आत्मकथा ‘तुज़ुक-ए-बाबरी’ तुर्की भाषा में लिखी गई थी।
बाबर की आत्मकथा का फारसी अनुवाद ‘बाबरनामा’ अब्दुर्रहीम खानखाना
ने किया था।
बाबर की मृत्यु 26 दिसंबर 1530 ईस्वी को हुई थी।
हुमायूँ बाबर का पुत्र था।
1539 ईस्वी में चौसा नामक स्थान पर हुमायूँ और शेरशाह
सूरी के बीच युद्ध हुआ था।
हुमायूँ का मकबरा दिल्ली में स्थित है।
1556 ईस्वी में शेर-ए-मंडल पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरकर
हुमायूँ की मृत्यु हो गई थी।
शेरशाह सूरी का शासनकाल 1540 ईस्वी से 1545 ईस्वी तक रहा।
शेरशाह सूरी के बचपन का नाम फरीद था।
शेरशाह सूरी के समय भूमि माप की इकाई गज थी।
किसान भूमि का विवरण सरकार को लिखित रूप में देते थे, जिसे कबूलियत कहा जाता था।
शेरशाह सूरी ने सोनारगाँव (बंगाल) से पेशावर को जोड़ने वाली सड़क बनवाई, जिसे ग्रांड ट्रंक
रोड कहा जाता है।
शेरपुर (दिल्ली के निकट) नगर की स्थापना शेरशाह सूरी ने की थी।
शेरशाह सूरी का मकबरा सासाराम (बिहार) में स्थित है।
कालिंजर के किले का निर्माण चंदेल शासकों ने कराया था।
हुमायूँ की मृत्यु 1556 ईस्वी में हुई थी।
शेरशाह सूरी की मृत्यु 1545 ईस्वी में हुई थी।
शेरशाह सूरी के काल में सरकार का सबसे बड़ा अधिकारी शिकदार-ए-शिकदारान कहलाता था।
शेरशाह सूरी के काल में परगना का सबसे बड़ा अधिकारी शिकदार कहलाता था।
अकबर का पूरा नाम जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर था।
अकबर के पिता का नाम हुमायूँ था।
अकबर की माता का नाम हमिदा बानो बेगम था।
1556 ईस्वी में पानीपत का द्वितीय युद्ध हुआ था।
पानीपत का द्वितीय युद्ध अकबर और हेमू के बीच हुआ था।
आमेर के राजपूत राजा भारमल की पुत्री का नाम हरखा बाई (जोधाबाई) था।
अकबर के संरक्षक (वली) का नाम बैरम खाँ था।
1576 ईस्वी में हल्दीघाटी का युद्ध हुआ था।
हल्दीघाटी का युद्ध हल्दीघाटी के मैदान में हुआ था।
हल्दीघाटी का युद्ध अकबर और महाराणा प्रताप के बीच हुआ था।
महाराणा प्रताप मेवाड़ के शासक थे।
चाँदबीबी अहमदनगर की रानी थीं।
रानी दुर्गावती गोंडवाना (मध्यप्रदेश) की शासिका थीं।
‘मनसब’ शब्द का अर्थ पद या प्रतिष्ठा होता है।
भूमि पैमाइश की प्रमुख इकाई गज-ए-इलाही थी।
अकबर ने दीन-ए-इलाही नामक धार्मिक मार्ग चलाया था।
‘अकबरनामा’ की रचना अबुल फ़ज़ल ने की थी।
अकबर के दरबार के प्रमुख संगीतकार तानसेन थे।
फतेहपुर सीकरी में जोधाबाई महल का निर्माण अकबर ने कराया था।
फतेहपुर सीकरी में पंचमहल का निर्माण अकबर ने कराया था।
फतेहपुर सीकरी में बुलंद दरवाजा का निर्माण अकबर ने कराया था।
फतेहपुर सीकरी में शेख सलीम चिश्ती की दरगाह का निर्माण अकबर ने
कराया था।
अकबर दीवान-ए-आम में राज्य की जनता से मुलाकात करता था।