पर्यावरण अर्थ एवं परिभाषा
- पर्यावरण शब्द 'परि' एवं 'आवरण' शब्दों की संधि से बना है जहाँ
परि का अर्थ होता है 'चारों तरफ' तथा आवरण का अर्थ होता है
'घेरा'।
- इस प्रकार पर्यावरण का अर्थ है- 'चारों तरफ से घेरना'।
- अर्थात् मनुष्य के चारों ओर का वह क्षेत्र जो उसे घेरे रहता है एवं उसके जीवन तथा क्रियाओं को प्रत्यक्ष या
अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है, पर्यावरण कहलाता है।
- पर्यावरण के अंग्रेजी पर्याय Environment, की उत्पत्ति फ्रेंच शब्द
Environer से हुई है, जिसका अर्थ होता है 'पड़ोस'।
- इस लिए हम पर्यावरण के लिए 'आस-पड़ोस' शब्द का भी प्रयोग कर सकते हैं।
- दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि हमारे आस-पड़ोस में पाए जाने वाले लोग,
स्थान, वस्तुएँ और प्रकृति पर्यावरण कहलाते हैं।
पर्यावरण के क्षेत्र
- पर्यावरण को निम्नलिखित चार क्षेत्रों में विभाजित किया गया है:
- (1) स्थल मण्डल
- (2) जल मण्डल
- (3) वायु मण्डल
- (4) जैव मण्डल
स्थल मण्डल
- पृथ्वी के ठोस ऊपरी परत या पर्पटी को स्थल मण्डल कहते हैं।
- पृथ्वी का लगभग एक-तिहाई (29%) भाग स्थल मण्डल है।
- यह मण्डल शैलों एवं खनिजों से निर्मित है।
- यह मण्डल मृदा की पतली परत से ढका हुआ है।
- इस मण्डल में पर्वत, पठार, मैदान, घाटी आदि पाये जाते
हैं।
स्थल मण्डल का महत्त्व
- यह मण्डल खनिजों का प्रमुख स्त्रोत है।
- यह मण्डल हमें वन, कृषि एवं रहने के लिए भूमि प्रदान करता है।
- यह मण्डल पशुओं को चरने के लिए घास स्थल प्रदान करता है।
जल मण्डल
- पृथ्वी पर पाये जाने वाले जल के क्षेत्र को जल मण्डल कहते हैं।
- पृथ्वी का लगभग दो-तिहाई (71%) भाग जल से ढका हुआ है।
- महासागर, झीलें, नदियाँ एवं अन्य जलाशय सम्मिलित रूप
से जल मण्डल का निर्माण करते हैं।
- जल विभिन्न दशाओं, जैसे-बर्फ, वाष्प एवं भूमिगत जल के
रूप में पाया जाता है।
जल मण्डल का महत्त्व
- जल सभी जीवों के लिए आवश्यक है।
- जल से ही बादलों का निर्माण होता है एवं वर्षा होती है।
वायु मण्डल
- पृथ्वी के चारों ओर मौजूद वायु के आवरण को वायु मण्डल कहते हैं।
- वायु मण्डल कई प्रकार की गैसों, जैसे-नाइट्रोजन,
ऑक्सीजन और कार्बन-डाइ-आक्साइड आदि का मिश्रण है।
- इस मण्डल में धूल के कण एवं जल वाष्प भी पाये जाते हैं।
वायु मण्डल का महत्व
- यह सूर्य की हानिकारक किरणों से हमारी रक्षा करता है।
- यह मौसम एवं जलवायु में परिवर्तन लाता है।
- यह रेडियो संचार में मदद करता है।
पर्यावरण के घटक
पर्यावरण के दो प्रमुख घटक
प्राकृतिक घटक
जीवीय / जैविक
- सजीव प्राणियों का संसार, जैसेः
- जन्तु
- पादप
अजीवीय / अजैविक / भौतिक
- निर्जीव पदार्थों का संसार, जैसे :
स्थल,
जल,
वायु,
प्रकाश,
मृदा,
ताप
मानव निर्मित घटक
- इमारतें,
उद्योग,
सड़क,
पुल,
पार्क,
संस्कृति
जैव मण्डल (Biosphere)
- जैव मंडल पृथ्वी का वह क्षेत्र है जहाँ जीवन संभव है, जिसमें स्थल, जल और वायु का संयोजन होता है।
- यह सभी जीवित प्राणियों का घर है और जैव विविधता का केंद्र है।
- उदाहरण: वन, समुद्री जीवन, मिट्टी के सूक्ष्मजीव।
पारिस्थितिक तंत्र या पारितंत्र (Ecosystem)
- पारिस्थितिक तंत्र जीवित और निर्जीव घटकों का एक ऐसा समूह है जो ऊर्जा प्रवाह और पदार्थ चक्रण के माध्यम
से संतुलित रहता है।
- प्रकार: प्राकृतिक (वन, समुद्र) और कृत्रिम (फार्म, उद्यान)।
- यह पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पारिस्थितिक तंत्र के घटक
- उत्पादक (Producers): पौधे जो सूर्य प्रकाश से ऊर्जा बनाते हैं (फोटोसिंथेसिस)।
- उपभोक्ता (Consumers): जंतु जो उत्पादकों या अन्य उपभोक्ताओं को खाते हैं (प्राथमिक, द्वितीयक,
तृतीयक)।
- अपघटक (Decomposers): बैक्टीरिया और कवक जो मृत पदार्थों को विघटित करते हैं।
- पर्यावरण कारक: जल, वायु, मिट्टी आदि।
खाद्य श्रृंखला/खाद्य कड़ी (Food Chain)
- खाद्य श्रृंखला ऊर्जा के प्रवाह को दर्शाती है जहाँ एक जीव दूसरे को खाता है।
- उदाहरण: घास → खरगोश → लोमड़ी → शव भक्षक।
- यह पारिस्थिक तंत्र में संतुलन बनाए रखती है।
खाद्य श्रृंखला के स्तर (Trophic Levels)
- खाद्य श्रृंखला के स्तर
- 1. द्विस्तरीय
: पौधे → हाथी
- 2. तृस्तरीय:
पौधे → हिरण → बाघ
- 3. चतुस्तरीय :
पौधे → खरगोश → लोमड़ी → बाघ
- 4. पंचस्तरीय :
पौधे → कीट (टिड्डा) → मेढ़क → साँप → मोर
- नोट: खाद्य श्रृंखला द्वारा घातक रसायनों को बढ़ती मात्रा को जैव-सान्द्रण कहते हैं।
- प्रत्येक स्तर पर ऊर्जा 10% हस्तांतरित होती है ( लिंडमेन का 10% का सिद्धांत )।
- ऊर्जा का मुख्य स्त्रोत सूर्य है
खाद्य जाल (Food Web)
- खाद्य जाल कई खाद्य श्रृंखलाओं का जाल है जो पारिस्थितिक तंत्र की जटिलता को दर्शाता है।
- यह एकल श्रृंखला से अधिक स्थिर होता है क्योंकि यदि एक श्रृंखला टूटे तो अन्य से संतुलन बना रहता है।
- उदाहरण: वन पारिस्थितिक तंत्र में विभिन्न जंतुओं के बीच संबंध।
पर्यावरण संरक्षण
- पर्यावरण संरक्षण प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा और प्रदूषण नियंत्रण की प्रक्रिया है।
- यह सतत विकास सुनिश्चित करता है और भावी पीढ़ियों के लिए संसाधन सुरक्षित रखता है।
- प्रयास: वृक्षारोपण, पुनर्चक्रण, प्रदूषण नियंत्रण।
अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन
- वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के लिए कई सम्मेलन हुए हैं।
मानव पर्यावरण पर स्टॉकहोम सम्मेलन, 1972
- स्वीडन के स्टॉकहोम में 5-16 जून 1972 को आयोजित।
- यह पहला अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन था। 'एक ही पृथ्वी' सिद्धांत अपनाया।
- UNEP (संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम) की स्थापना।
- 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस घोषित।
पृथ्वी सम्मेलन, 1992
- ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में 3-14 जून 1992 को आयोजित।
- एजेंडा 21 दस्तावेज जारी: सतत विकास पर।
- जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन और जैव विविधता संधि पर हस्ताक्षर।
- पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन पर जोर।
भारत में पर्यावरण संरक्षण
- भारत ने कई कानून और नीतियाँ बनाई हैं पर्यावरण संरक्षण के लिए।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986
- 23 मई 1986 को पारित, 19 नवंबर 1986 से लागू।
- भोपाल गैस त्रासदी के बाद लाया गया।
- उद्देश्य: प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरण सुधार और संरक्षण।
- 26 धाराएँ, 4 अध्याय; केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्थापना।
पर्यावरण सम्बन्धी प्रमुख आंदोलन
- भारत में जन आंदोलनों ने पर्यावरण संरक्षण को मजबूत किया।
चिपको आंदोलन
- 1973 में उत्तराखंड (रेनी गाँव) से शुरू, सुंदरलाल बहुगुणा के नेतृत्व में।
- महिलाएँ पेड़ों से चिपककर वनों की कटाई रोकी।
- अहिंसक विरोध; 173 कानून बने।
- प्रेरणा: अमृता देवी बिश्नोई (खेजड़ली, 1730)।
अप्पिको आंदोलन
- 1983 में कर्नाटक (उत्तर कन्नड़ जिला) से शुरू, पांडुरंग हेगड़े के नेतृत्व में।
- चिपको आंदोलन से प्रेरित; वनों संरक्षण के लिए।
- स्थानीय समुदायों ने पेड़ों को गले लगाकर बचाया।
- परिणाम: वन नीति में बदलाव।
नर्मदा आंदोलन
- 1980 के दशक से, मेधा पाटकर और बाबा आम्टे के नेतृत्व में।
- नर्मदा घाटी पर बांधों (सरदार सरोवर) के विरोध में।
- विस्थापन, पर्यावरण क्षति और आदिवासी अधिकारों पर केंद्रित।
- परिणाम: विश्व बैंक ने फंडिंग रोकी।
पर्यावरण संरक्षण सम्बन्धी पुरस्कार
- भारत सरकार द्वारा पर्यावरण योगदान के लिए दिए जाते हैं।
इन्दिरा गाँधी पर्यावरण पुरस्कार
- 1987 से शुरू।
- व्यक्ति या संगठन को पर्यावरण संरक्षण में योगदान के लिए।
- राशि: 10 लाख रुपये, ट्रॉफी और प्रमाण पत्र।
- उद्देश्य: वैश्विक पर्यावरण जागरूकता।
राजीव गाँधी पर्यावरण पुरस्कार
- 1993 से शुरू।
- औद्योगिक इकाइयों को स्वच्छ प्रौद्योगिकी के लिए।
- राशि: 5 लाख रुपये, ट्रॉफी।
- उद्देश्य: प्रदूषण कम करने वाले उद्योगों को प्रोत्साहन।
स्मरणीय तथ्य
- पृथ्वी दिवस: 22 अप्रैल।
- जैविक विविधता दिवस: 22 मई।
- विश्व पर्यावरण दिवस: 5 जून।
- विश्व प्रकृति दिवस: 3 मार्च।
- विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस: 26 नवम्बर।
- नीतियाँ: राष्ट्रीय पर्यावरण नीति 2006, स्वच्छ भारत अभियान।
- जैव विविधता: भारत 8% वैश्विक जैव विविधता वाला देश।
पर्यावरण संबंधी सप्ताह एवं माह
- वन महोत्सव: फरवरी और जुलाई का प्रथम सप्ताह।
- वन्य जीव सप्ताह: 1-7 अक्टूबर।
- राष्ट्रीय पर्यावरण जागरूकता माह: 19 अक्टूबर से 18 नवम्बर।
विश्व में पर्यावरण संरक्षण हेतु संस्थाएँ
- WWF (World Wide Fund for Nature): 1961 में स्थापित। जैव विविधता, वन्यजीव संरक्षण और जलवायु
परिवर्तन पर कार्य।
- UNEP (United Nations Environment Programme): 1972 में स्टॉकहोम सम्मेलन में स्थापित। पर्यावरण
संरक्षण के लिए वैश्विक नीतियाँ।
अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: पर्यावरण शिक्षा को पाठ्यक्रम में एकीकृत।
- सतत विकास लक्ष्य (SDG): UN के 17 लक्ष्यों में पर्यावरण शामिल।