परिचय
पारिस्थितिकी पर्यावरण अध्ययन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो जीवधारियों और उनके पर्यावरण के बीच संबंधों का अध्ययन करता है। यह विषय SSC, PCS, TET, IAS, और Railway जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सामान्य ज्ञान और पर्यावरण अध्ययन के प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है। इस पेज में पारिस्थितिकीय अवधारणाओं जैसे बायोम, पारिस्थितिकी अनुक्रमण, जैव-सान्द्रण, और अन्य महत्वपूर्ण शब्दों की जानकारी दी गई है, जो परीक्षाओं के लिए उपयोगी है।
प्रमुख पारिस्थितिकीय अवधारणाएँ
निम्नलिखित तालिका में प्रमुख पारिस्थितिकीय अवधारणाएँ और उनकी परिभाषाएँ दी गई हैं:
| अवधारणा | परिभाषा |
|---|---|
| बायोम (Biome) | किसी पारिस्थितिक तंत्र में पौधों और प्राणियों के सम्मिलित रूप को बायोम कहते हैं। |
| बारियल (Boreal) | भारत में 40% वनस्पतियाँ बाहरी (exotic) हैं, जो तिब्बत और चीन से संबंधित हैं और बोरियल कहलाती हैं। |
| इडेफोलाजी (Edaphology) | पौधों की वृद्धि और विकास में मृदा की भूमिका का अध्ययन करने वाला विज्ञान। |
| बेन्धौस (Benthos) | जल की सबसे निचली सतह (कीचड़) में रहने वाले सूक्ष्म जीव। |
| पारिस्थितिकी चरम (Ecological Climax) | पारिस्थितिकी तंत्र में प्रजातियों का निश्चित स्वरूप, जिसमें बदलाव न्यूनतम होता है। |
| पारिस्थितिकी अनुक्रमण (Ecological Succession) | जब एक जैव समुदाय का स्थान दूसरे जैव समुदाय द्वारा ग्रहण किया जाता है। |
| लियाना (Liana) | ऊष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों में उगने वाली लता, जो वृक्ष के तने से लिपटकर ऊपर तक पहुँचती है। |
| अधिपादप (Epiphytes) | पौधे जिनका संबंध भोजन आधारित न होकर केवल आवास आधारित होता है। |
| यूट्रोफिक (Eutrophic) | जल क्षेत्र जिसमें पोषक पदार्थों की प्रचुरता होती है, जो पौधों की तीव्र वृद्धि के लिए उपयुक्त है। |
| चम्पारल (Chapparal) | भूमध्यसागरीय जलवायु का क्षेत्र, जहाँ सर्दियों में वर्षा और गर्मी शुष्क होती है। |
| एज प्रभाव (Edge Effect) | जब दो समुदायों को विभाजित करने वाले इकोटोन की पहचान आसानी से नहीं होती। |
| शीत निष्क्रियता (Hibernation) | असमतापी जंतुओं (जैसे मेंढक, साँप) द्वारा सर्दियों में निष्क्रिय अवस्था में रहना। |
| ग्रीष्म निष्क्रियता (Aestivation) | गर्मियों में मेंढक आदि द्वारा निष्क्रिय अवस्था में रहना। |
| पारिस्थितिकीय निचे (Ecological Niche) | पारिस्थितिक तंत्र में किसी जीवधारी का निश्चित कार्य और स्थान। |
| समतापी जंतु (Warm-Blooded Animals) | जंतु जिनका शरीर का ताप हर मौसम में समान रहता है (जैसे मनुष्य, पक्षी)। |
| असमतापी जंतु (Cold-Blooded Animals) | जंतु जिनका शरीर का ताप वातावरण के अनुसार बदलता है (जैसे मछली, उभयचर)। |
| हरित लेखा परीक्षण (Green Audit) | पर्यावरणीय प्रभावों की जाँच-पड़ताल। |
| इको चिह्न (Eco Mark) | पर्यावरण अनुकूल उत्पादों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा दिया गया चिह्न। |
| हरित मफ्लर (Green Muffler) | ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए सड़कों के किनारे पौधों की कतारें। |
| जैव-सान्द्रण (Bio-Magnification) | प्रदूषकों (जैसे DDT) का खाद्य श्रृंखला में सान्द्रण बढ़ना। |
| जैव-क्षयकारी प्लास्टिक (Biodegradable Plastic) | प्लास्टिक जो सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटित हो जाता है। |
अन्य महत्वपूर्ण अवधारणाएँ
निम्नलिखित अवधारणाएँ भी पर्यावरण अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण हैं:
| अवधारणा | परिभाषा |
|---|---|
| भोपाल त्रासदी (Bhopal Tragedy) | दिसंबर 1984 में भोपाल में मिथाइल आइसोसाइनेट गैस रिसाव से हुई त्रासदी। |
| साइलेंट स्प्रिंग (Silent Spring) | रसेल कार्सन का उपन्यास, जिसने DDT के हानिकारक प्रभावों को उजागर किया। |
| भूरी बर्फ (Grey Snow) | नार्वे और जर्मनी में प्रदूषण के कारण भूरी हुई बर्फ। |
| जीन बैंक (Gene Bank) | पादप प्रजातियों, बीजों, और जीनों का संग्रह। |
| जीन पूल (Gene Pool) | किसी प्रजाति की पूरी जनसंख्या के जीनों का समग्र। |
| संरक्षण पारिस्थितिकी (Conservation Ecology) | प्राकृतिक संसाधनों के उचित प्रयोग और प्रबंधन का अध्ययन। |
| प्रकाशित मण्डल (Photic Zone) | सागर में 200 मीटर तक की गहराई, जहाँ सूर्य की किरणें पहुँचती हैं। |
| अप्रकाशित मण्डल (Aphotic Zone) | सागर में 200 मीटर से अधिक गहराई, जहाँ सूर्य की किरणें नहीं पहुँचतीं। |
| नेक्टन (Nekton) | अप्रकाशित मण्डल में रहने वाले जीव। |
| नेरेटिक पदार्थ (Neretic Matter) | सागर तट के पास निक्षेपित होने वाले पदार्थ। |
| पैलेजिक पदार्थ (Pelagic Matter) | गहरे सागरीय मैदानों की तली पर निक्षेपित पदार्थ। |
| महाद्वीपीय निमग्न तट (Continental Shelves) | महाद्वीपों के छिछले सागरीय जल में डूबे सीमान्त भाग। |
| महाद्वीपीय मग्न ढाल (Continental Slope) | निमग्न तट और गहरे सागरीय मैदान के बीच का क्षेत्र। |
| कृषि पारिस्थितिकी (Agro Ecology) | कृषि फसलों और उनके वातावरण के बीच संबंधों का अध्ययन। |
| सहजीविता (Symbiosis) | दो प्रजातियों के बीच पारस्परिक लाभवर्धक संबंध। |
पारिस्थितिकी की शाखाएँ
पारिस्थितिकी की निम्नलिखित शाखाएँ महत्वपूर्ण हैं:
- एश्चुअराइन पारिस्थितिकी (Estuarine Ecology): नदी के मुहाने और समुद्र के मिलन क्षेत्र में जीवधारियों का अध्ययन।
- संरक्षण पारिस्थितिकी (Conservation Ecology): प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन का अध्ययन।
- संख्या पारिस्थितिकी (Population Ecology): एक प्रजाति के जीवों की पारस्परिक क्रियाओं का अध्ययन।
- बायोम पारिस्थितिकी (Biome Ecology): समान जलवायु में जैविक समुदायों के अनुक्रम का अध्ययन।
- पारिस्थितिक तंत्र पारिस्थितिकी (Ecosystem Ecology): जीवधारियों और उनके भौतिक पर्यावरण के बीच संबंधों का अध्ययन।
- समुदाय पारिस्थितिकी (Community Ecology): विभिन्न प्रजातियों के बीच परस्परावलंबन का अध्ययन।
शैक्षणिक महत्व
पारिस्थितिकीय अवधारणाएँ पर्यावरण अध्ययन का आधार हैं और SSC, PCS, TET, IAS, और Railway जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछी जाती हैं। ये अवधारणाएँ पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन को समझने में मदद करती हैं। छात्रों को इन शब्दों, उनकी परिभाषाओं, और उदाहरणों को याद रखना चाहिए।
✅ आसान याद रखने की बातें
- बायोम: पौधों और प्राणियों का सम्मिलित रूप।
- पारिस्थितिकी अनुक्रमण: जैव समुदाय का स्थानांतरण।
- जैव-सान्द्रण: DDT जैसे प्रदूषकों का खाद्य श्रृंखला में सान्द्रण।
- शीत/ग्रीष्म निष्क्रियता: असमतापी जंतुओं (जैसे मेंढक) की निष्क्रिय अवस्था।
- हरित मफ्लर: ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए पौधों की कतारें।
- इको चिह्न: पर्यावरण अनुकूल उत्पादों का चिह्न।
- सहजीविता: लाइकेन और राइजोबियम बैक्टीरिया उदाहरण।
अतिरिक्त महत्वपूर्ण बिंदु
- पारिस्थितिक तंत्र का महत्व: पारिस्थितिक तंत्र जैविक और अजैविक घटकों के बीच संतुलन बनाए रखता है।
- प्रदूषण का प्रभाव: जैव-सान्द्रण के कारण DDT जैसे प्रदूषक उच्च पोषण स्तर पर खतरनाक हो सकते हैं।
- पर्यावरण संरक्षण: हरित लेखा परीक्षण और इको क्लब जैसे प्रयास पर्यावरण जागरूकता बढ़ाते हैं।
- प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण: संरक्षण पारिस्थितिकी प्राकृतिक संसाधनों के टिकाऊ उपयोग को बढ़ावा देती है।
- महासागरीय क्षेत्र: प्रकाशित और अप्रकाशित मण्डल सागरीय जीवों के आवास को परिभाषित करते हैं।
सारांश
पारिस्थितिकीय अवधारणाएँ पर्यावरण और जीवधारियों के बीच संबंधों को समझने में महत्वपूर्ण हैं। बायोम, पारिस्थितिकी अनुक्रमण, जैव-सान्द्रण, और शीत/ग्रीष्म निष्क्रियता जैसी अवधारणाएँ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवश्यक हैं। हरित मफ्लर, इको चिह्न, और जैव-क्षयकारी प्लास्टिक जैसे उपाय पर्यावरण संरक्षण में योगदान देते हैं। यह जानकारी SSC, PCS, TET, IAS, और Railway परीक्षाओं के लिए उपयोगी है।