Education and Psychology
आधुनिक समय में शिक्षा शब्द का उपयोग अनेक अर्थों में किया जाता है। यह न केवल ज्ञान और कौशल प्रदान करती है, बल्कि व्यक्ति के समग्र विकास और सामाजिक कल्याण में योगदान देती है।
व्यक्ति जन्म के समय असहाय होता है और दूसरों की सहायता से अपनी आवश्यकताओं को पूरा करता है। जैसे-जैसे वह बड़ा होता है, वह अपनी आवश्यकताओं को पूरा करना और अपने वातावरण से अनुकूलन करना सीखता है।
शिक्षा न केवल उसे वातावरण से अनुकूलन करने में सहायता देती है, बल्कि उसके व्यवहार में वांछनीय परिवर्तन भी लाती है, जिससे वह स्वयं और समाज का कल्याण करने में सफल होता है।
रेबर्न के अनुसार, मनोविज्ञान ने अरस्तू के समय में दर्शनशास्त्र के अंग के रूप में अपना जीवन शुरू किया। कई शताब्दियों तक इसे दर्शनशास्त्र के हिस्से के रूप में अध्ययन किया गया। आधुनिक काल में मनोवैज्ञानिकों ने इसे दर्शनशास्त्र से पृथक कर एक स्वतंत्र विज्ञान बनाया।
मनोविज्ञान शब्द यूनानी शब्दों Psyche (आत्मा) और Logos (अध्ययन) से बना है। प्राचीन काल में इसे आत्मा का अध्ययन माना जाता था। (प्लेटो, अरस्तू, डेकार्ट)
मध्य युग में दार्शनिकों ने मनोविज्ञान को मस्तिष्क का अध्ययन माना। (बी.एन. झा)
19वीं शताब्दी में वाइव्स, विलियम जेम्स, विल्हेम वुंट आदि ने इसे चेतना का विज्ञान माना।
20वीं शताब्दी में सबसे स्वीकृत अर्थ — मनुष्य के व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन।
शिक्षा और मनोविज्ञान एक-दूसरे के पूरक हैं। शिक्षा व्यक्ति और समाज के कल्याण के लिए वांछनीय परिवर्तन लाती है, जबकि मनोविज्ञान व्यवहार और अनुभवों को समझने में मदद करता है।
मनोविज्ञान का विकास आत्मा से व्यवहार तक की यात्रा को दर्शाता है, जो इसे एक वैज्ञानिक अनुशासन बनाता है।