प्रवर्तक: प्राचीन यूनानी दार्शनिक जैसे सुकरात, प्लेटो एवं अरस्तू (ग्रीस), आधुनिक रूप में व्यापक उपयोग।
वर्ष: प्राचीन काल से (लगभग 400 ई.पू.)
परिभाषा: शिक्षक मुख्य रूप से बोलकर ज्ञान प्रदान करता है, छात्र सुनते हैं।
विशेषताएँ: शिक्षक केंद्रित, एकतरफा संचार।
लाभ: बड़े समूह में त्वरित ज्ञान प्रदान।
हानियाँ: छात्र निष्क्रिय, ध्यान भटक सकता है।
उदाहरण: कक्षा 8 की विज्ञान की कक्षा में शिक्षक "मानव पाचन तंत्र" पर व्याख्यान दे रहा है। वह ब्लैकबोर्ड पर चित्र बनाते हुए कहता है, "जब हम भोजन करते हैं, तो सबसे पहले मुंह में लार ग्रंथियाँ सक्रिय होती हैं। लार में एमाइलेज एंजाइम होता है जो स्टार्च को तोड़ता है। फिर भोजन ग्रासनली से पेट में जाता है, जहाँ गैस्ट्रिक जूस एसिड और पेप्सिन से प्रोटीन पचता है। इसके बाद छोटी आंत में पित्त और अग्न्याशय के रस मिलकर वसा और कार्बोहाइड्रेट को तोड़ते हैं। बड़ी आंत पानी सोखती है।" शिक्षक 30 मिनट तक लगातार बोलता है, बीच-बीच में चित्र बनाता है और छात्र नोट्स लेते हैं। अंत में शिक्षक कहता है, "घर पर डायग्राम बनाकर लाओ।" छात्रों ने तथ्य सुने, लेकिन कोई प्रश्न या क्रियाकलाप नहीं हुआ। यह विधि तथ्यों को जल्दी कवर करने में अच्छी है, लेकिन छात्रों की समझ की जाँच नहीं होती।
प्रवर्तक: सुकरात (ग्रीस), सुकराती संवाद पद्धति से प्रेरित।
वर्ष: लगभग 400 ई.पू.
परिभाषा: छात्र और शिक्षक मिलकर विषय पर बातचीत करते हैं।
विशेषताएँ: द्विपक्षीय संचार, आलोचनात्मक सोच।
लाभ: विभिन्न दृष्टिकोण, छात्र सक्रिय।
हानियाँ: समय अधिक, विषय से भटकाव।
उदाहरण: कक्षा 10 की सामाजिक विज्ञान की कक्षा में विषय है "लोकतंत्र की सफलता और चुनौतियाँ"। शिक्षक शुरू करता है, "बच्चों, भारत एक लोकतंत्र है। क्या आपको लगता है कि यहाँ लोकतंत्र पूरी तरह सफल है?" एक छात्र कहता है, "हाँ सर, क्योंकि हम चुनाव करते हैं।" दूसरा कहता है, "नहीं सर, भ्रष्टाचार बहुत है।" शिक्षक पूछता है, "भ्रष्टाचार लोकतंत्र को कैसे प्रभावित करता है?" छात्र उदाहरण देते हैं – "नेताओं का पैसा खाना, वोट खरीदना।" शिक्षक कहता है, "तो समाधान क्या हो सकता है?" छात्र सुझाव देते हैं – "शिक्षा बढ़ाओ, सख्त कानून।" पूरी कक्षा में 40 मिनट तक छात्र अपनी राय रखते हैं, शिक्षक केवल मार्गदर्शन करता है और अंत में सारांश देता है। छात्रों ने न केवल सुना, बल्कि सोचा और बोला भी।
प्रवर्तक: जॉन ड्यूवी (अमेरिका) की प्रगतिवादी शिक्षा से जुड़ी।
वर्ष: 20वीं शताब्दी की शुरुआत
परिभाषा: शिक्षक व्यावहारिक रूप से दिखाकर सिखाता है।
विशेषताएँ: दृश्य एवं व्यावहारिक।
लाभ: अवधारणा स्पष्ट, रुचिकर।
हानियाँ: संसाधन आवश्यक।
उदाहरण: कक्षा 7 की विज्ञान लैब में शिक्षक "संवेग संरक्षण" का प्रदर्शन कर रहा है। वह दो गेंदें लेता है – एक भारी, एक हल्की। कहता है, "देखो, मैं भारी गेंद को गतिशील कर हल्की स्थिर गेंद से टकराता हूँ।" टकराने पर हल्की गेंद तेज़ उड़ती है। शिक्षक दोहराता है और पूछता है, "क्या हुआ?" छात्र कहते हैं, "संवेग स्थानांतरित हुआ।" फिर शिक्षक न्यूटन का तृतीय नियम समझाता है। छात्र उत्साहित होकर नोट करते हैं और बाद में खुद प्रयोग करते हैं। पूरी प्रक्रिया में छात्र देखते हैं, समझते हैं और स्मृति में गहराई से बैठ जाता है।
प्रवर्तक: जॉन ड्यूवी (John Dewey, अमेरिका)
वर्ष: 1918
परिभाषा: छात्र वास्तविक समस्या पर प्रोजेक्ट बनाते हैं।
विशेषताएँ: समस्या आधारित, समूह कार्य।
लाभ: जीवन कौशल, रुचि।
हानियाँ: समय अधिक।
उदाहरण: कक्षा 6 की पर्यावरण अध्ययन में शिक्षक कहता है, "आपको एक महीने का प्रोजेक्ट करना है – 'हमारे क्षेत्र में जल संरक्षण'।" छात्र ग्रुप बनाते हैं। वे घर-घर सर्वे करते हैं कि लोग पानी कैसे बचाते हैं, नदी का पानी जाँचते हैं, वर्षा जल संचयन मॉडल बनाते हैं। अंत में कक्षा में प्रस्तुति देते हैं – चार्ट, मॉडल, फोटो दिखाते हैं और कहते हैं, "हमने पाया कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग से 30% पानी बच सकता है।" शिक्षक मूल्यांकन करता है – सामग्री, प्रस्तुति, टीम वर्क पर। छात्रों ने न केवल पढ़ा, बल्कि अनुसंधान किया, बनाया और सीखा।
प्रवर्तक: जॉन ड्यूवी (अमेरिका)
वर्ष: 1910
परिभाषा: छात्र समस्या को चरणबद्ध हल करते हैं।
विशेषताएँ: अन्वेषण आधारित।
लाभ: तार्किक सोच।
उदाहरण: कक्षा 9 की गणित में शिक्षक कहता है, "समस्या है – एक दुकानदार 20% लाभ पर सामान बेचता है, लेकिन अगर 10% छूट दे तो भी 8% लाभ रहता है। मूल मूल्य क्या है?" छात्र ग्रुप में सोचते हैं – पहले परिकल्पना लगाते हैं, मान लें मूल्य 100 रुपये, फिर गणना करते हैं, गलती सुधारते हैं, अंत में सूत्र से हल करते हैं। शिक्षक केवल मार्गदर्शन करता है, "सही दिशा में हो।" अंत में छात्र खुद उत्तर निकालते हैं और खुश होते हैं।
प्रवर्तक: फ्रांसिस बेकन (इंग्लैंड)
वर्ष: 1620
परिभाषा: विशिष्ट उदाहरणों से सामान्य नियम निकालना।
उदाहरण: कक्षा 5 की हिंदी व्याकरण में शिक्षक कई वाक्य लिखता है – "राम खेलता है, सीता नाचती है, बच्चे पढ़ते हैं।" फिर पूछता है, "इन वाक्यों में क्रिया शब्दों का अंत कैसे है?" छात्र देखते हैं और कहते हैं, "ता है, ती है, ते हैं।" शिक्षक कहता है, "ये वर्तमान काल के चिह्न हैं।" इस तरह छात्र खुद नियम निकालते हैं। विज्ञान में विभिन्न धातुओं को गर्म कर विस्तार देखकर "सभी धातुएँ गर्म करने पर फैलती हैं" नियम निकालते हैं।
प्रवर्तक: अरस्तू (ग्रीस)
वर्ष: प्राचीन काल
परिभाषा: सामान्य नियम से विशिष्ट उदाहरण।
उदाहरण: कक्षा 8 की गणित में शिक्षक पहले नियम बताता है, "समांतर चतुर्भुज के आमने-सामने के कोण बराबर होते हैं।" फिर कई आकृतियाँ देकर कहता है, "अब इनमें कोण मापो और जाँचो।" छात्र नियम लागू कर सत्यापित करते हैं। यह विधि तेज है, लेकिन छात्र खुद नियम नहीं खोजते।
प्रवर्तक: प्रोफेसर हेनरी एडवर्ड आर्मस्ट्रांग (इंग्लैंड)
वर्ष: 1909
उदाहरण: विज्ञान लैब में शिक्षक कहता है, "आपको खुद पता लगाना है कि अम्ल और क्षारक मिलाने पर क्या होता है।" छात्र विभिन्न अम्ल-क्षारक मिलाते हैं, लिटमस पेपर जाँचते हैं, निष्कर्ष निकालते हैं कि "अम्ल और क्षारक मिलकर लवण और पानी बनाते हैं।" शिक्षक केवल प्रश्न पूछता है, "क्या देखा? क्यों हुआ?" छात्र वैज्ञानिक की तरह खोज करते हैं।
प्रवर्तक: फ्रेडरिक फ्रोबेल (जर्मनी)
वर्ष: 1837
उदाहरण: कक्षा 1 में शिक्षक गिनती सिखाने के लिए गेंद खेल खेलता है – "गेंद फेंको और 1 से 10 तक गिनो।" बच्चे हँसते-खेलते गिनती सीख जाते हैं। अंग्रेजी में "Simon Says" खेल से निर्देश समझते हैं। बच्चे तनाव मुक्त होकर सीखते हैं।
प्रवर्तक: डॉ. मारिया मोंटेसरी (इटली)
वर्ष: 1907
उदाहरण: प्री-स्कूल में बच्चे स्वतंत्र रूप से सामग्री चुनते हैं – एक बच्चा सिलिंडर ब्लॉक्स से आकार मिलाता है, दूसरा बीड्स से गिनती, तीसरा रेत के अक्षर बनाता है। शिक्षक केवल देखता और आवश्यकता पर मदद करता है। बच्चे अपनी गति से सीखते हैं।
प्रवर्तक: जॉन ड्यूवी एवं प्रगतिवादी शिक्षाशास्त्री (अमेरिका)
वर्ष: 20वीं शताब्दी
उदाहरण: कक्षा 4 में "फ्रेक्शन" सिखाने के लिए शिक्षक पिज्जा काटता है – "यह 8 टुकड़ों में कटा है, अगर 2 खाओ तो कितना बचा?" बच्चे खुद कागज काटकर फ्रेक्शन बनाते हैं और समझ जाते हैं।
प्रवर्तक: डेविड जॉनसन एवं रोजर जॉनसन (अमेरिका)
वर्ष: 1970-1980
उदाहरण: कक्षा 9 में "भारत का मानचित्र" बनाने का कार्य ग्रुप को दिया जाता है। एक छात्र नदियाँ बनाता है, दूसरा पर्वत, तीसरा शहर। सभी मिलकर पूरा करते हैं और प्रस्तुत करते हैं। कमजोर छात्र मजबूत से सीखता है।
प्रवर्तक: जोनाथन बर्गमैन एवं एरॉन सैम्स (अमेरिका)
वर्ष: 2007
उदाहरण: गणित में शिक्षक घर पर "त्रिभुज के प्रकार" का 10 मिनट का वीडियो भेजता है। बच्चे घर पर देखते हैं। कक्षा में शिक्षक कहता है, "अब ग्रुप में त्रिभुज बनाओ और गुण बताओ।" छात्र अभ्यास करते हैं, शिक्षक संदेह दूर करता है।
प्रवर्तक: जोसेफ श्वाब (अमेरिका)
वर्ष: 1960 के दशक
उदाहरण: विज्ञान में शिक्षक पूछता है, "पौधों को बढ़ने के लिए क्या चाहिए?" छात्र प्रश्न बनाते हैं, प्रयोग डिजाइन करते हैं (प्रकाश, पानी, मिट्टी बदलकर), डेटा इकट्ठा करते हैं और निष्कर्ष निकालते हैं।