अध्ययन और अध्यापन: बोध, प्रेरणा, और अधिगम के कारक
बोध और संवेदनाएँ
- संवेदनाएँ (Sensation): यह वह प्रक्रिया है जिसमें इंद्रियाँ (दृष्टि, श्रवण, स्पर्श, आदि) पर्यावरण से जानकारी प्राप्त करती हैं। उदाहरण: कक्षा में बोर्ड पर लिखे शब्द देखना।
- बोध (Perception): संवेदनाओं को मस्तिष्क द्वारा अर्थपूर्ण जानकारी में बदलने की प्रक्रिया। उदाहरण: बोर्ड पर लिखे शब्दों को समझना।
- मनोवैज्ञानिक आधार: गेस्टाल्ट मनोविज्ञान (1912, मैक्स वर्थाइमर) के अनुसार, बोध समग्र रूप से काम करता है (जैसे "पूरा हिस्सों के योग से अधिक है")।
- कक्षा में उपयोगिता: शिक्षक दृश्य-श्रव्य सामग्री (TLM) का उपयोग कर संवेदनाओं को बोध में बदल सकते हैं।
- CTET/UPTET महत्व: संवेदनाओं और बोध की समझ शिक्षण को प्रभावी बनाती है, विशेष रूप से समावेशी बच्चों के लिए (जैसे दृष्टिबाधित के लिए ब्रेल)।
- नोट: संवेदनाएँ बोध का आधार हैं, और बोध अधिगम का प्रारंभिक चरण है।
प्रेरणा और अधिगम
- प्रेरणा (Motivation): वह आंतरिक या बाह्य शक्ति जो बालक को सीखने के लिए प्रेरित करती है।
- प्रकार:
- आंतरिक प्रेरणा: स्वयं की रुचि और जिज्ञासा (जैसे पढ़ने का शौक)।
- बाह्य प्रेरणा: पुरस्कार, प्रशंसा, या दंड से प्रेरणा (स्किनर, 1953)।
- मास्लो का आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धान्त (1943): बुनियादी आवश्यकताएँ (भोजन, सुरक्षा) पूरी होने पर ही उच्च स्तर की प्रेरणा (आत्मसम्मान, आत्म-प्रकटीकरण) संभव।
- कक्षा में उपयोगिता: शिक्षक सकारात्मक सुदृढीकरण (प्रशंसा) और रुचिकर गतिविधियों (प्रोजेक्ट) से प्रेरणा बढ़ा सकते हैं।
- CTET/UPTET महत्व: प्रेरणा की समझ शिक्षकों को छात्रों की रुचि और अधिगम को बढ़ाने में मदद करती है।
- नोट: प्रेरणा अधिगम की गति और गुणवत्ता को प्रभावित करती है।
अधिगम में योगदान देने वाले कारक: निजी और पर्यावरणीय
- निजी कारक:
- बुद्धि (Intelligence): गार्डनर का बहुबुद्धि सिद्धान्त (1983) - विभिन्न प्रकार की बुद्धियाँ (भाषाई, तार्किक, स्थानिक, आदि)।
- प्रेरणा: आंतरिक और बाह्य प्रेरणा अधिगम को प्रभावित करती है।
- स्वास्थ्य: शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य (जैसे पोषण, नींद)।
- रुचि और दृष्टिकोण: सकारात्मक दृष्टिकोण और रुचि अधिगम को बढ़ावा देती है।
- आत्मविश्वास: आत्म-प्रभावकारिता (बान्दुरा, 1977) सीखने की प्रेरणा देती है।
- विशेष आवश्यकताएँ: डिस्लेक्सिया, ADHD, या अन्य अक्षमताएँ अधिगम को प्रभावित करती हैं।
- पर्यावरणीय कारक:
- परिवार: माता-पिता का समर्थन, शिक्षा का स्तर, और आर्थिक स्थिति।
- स्कूल: शिक्षक की योग्यता, कक्षा का वातावरण, संसाधन (जैसे TLM)।
- समुदाय: सामाजिक समर्थन, सांस्कृतिक मूल्य, और जागरूकता।
- संस्कृति: भाषा, परंपराएँ, और सामाजिक मानदंड।
- सामाजिक अंतःक्रिया: सहपाठी और शिक्षक के साथ सहयोग (वायगोत्स्की, 1978)।
- CTET/UPTET महत्व: निजी और पर्यावरणीय कारकों की समझ शिक्षकों को वैयक्तिक और समावेशी शिक्षण रणनीतियाँ बनाने में मदद करती है।
- नोट: निजी और पर्यावरणीय कारक परस्पर संनादी हैं और अधिगम को समग्र रूप से प्रभावित करते हैं।
यूपी टीईटी और सीटीईटी के लिए अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020: स्थापना 29 जुलाई 2020। निजी और पर्यावरणीय कारकों को ध्यान में रखकर समग्र और समावेशी शिक्षा पर जोर।
- शिक्षा का अधिकार (RTE) 2009: स्थापना 1 अप्रैल 2010। सभी बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा, विशेष रूप से अपवंचित और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए।
- निरंतर और समग्र मूल्यांकन (CCE): CBSE द्वारा 2009 में लागू। निजी कारकों (जैसे बुद्धि, रुचि) का मूल्यांकन।
- पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त: स्थापना 1960। बोध और संवेदनाओं के आधार पर अधिगम के चरण।
- वायगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धान्त: स्थापना 1978। सामाजिक अंतःक्रिया और पर्यावरण की भूमिका।
- मास्लो का आवश्यकता पदानुक्रम: स्थापना 1943। प्रेरणा का आधार।
- बान्दुरा का सामाजिक अधिगम सिद्धान्त: स्थापना 1977। पर्यावरणीय कारकों और आत्म-प्रभावकारिता की भूमिका।
- NCERT: स्थापना 1961, नई दिल्ली। बोध, प्रेरणा, और अधिगम के लिए पाठ्यक्रम और सामग्री।
- SCERT उत्तर प्रदेश: स्थापना 1981, लखनऊ। राज्य स्तर पर शिक्षण और अधिगम सामग्री।
- RPWD Act 2016: स्थापना 27 दिसंबर 2016। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए अनुकूलित शिक्षण और प्रेरणा।
- शिक्षक की भूमिका: बोध, प्रेरणा, और कारकों को समझकर वैयक्तिक और प्रभावी शिक्षण।
- CTET/UPTET महत्व: बोध, प्रेरणा, और अधिगम कारकों से संबंधित प्रश्न परीक्षा में अक्सर पूछे जाते हैं।