सीखने का अर्थ और सिद्धान्त
सीखने (अधिगम) का अर्थ
- अधिगम एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति अनुभव, अभ्यास, या शिक्षण के माध्यम से अपने व्यवहार,
ज्ञान, कौशल, या दृष्टिकोण में परिवर्तन लाता है।
- यह एक सतत और सक्रिय प्रक्रिया है जो पर्यावरण के साथ अंतःक्रिया से होती है।
- "अधिगम वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यवहार में अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन अनुभव के
माध्यम से होता है।" – स्किनर
- नोट: अधिगम केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि उसे लागू करने और जीवन में उपयोग
करने की क्षमता भी है।
सीखने के सिद्धान्त
- थॉर्नडाइक का प्रभाव का नियम (Law of Effect): सकारात्मक परिणाम देने वाले व्यवहार दोहराए जाने
की संभावना अधिक होती है।
- थॉर्नडाइक का अभ्यास का नियम (Law of Exercise): बार-बार अभ्यास से सीखा हुआ व्यवहार मजबूत होता
है।
- थॉर्नडाइक का तत्परता का नियम (Law of Readiness): सीखने की इच्छा होने पर अधिगम अधिक प्रभावी
होता है।
- पावलोव का शास्त्रीय अनुबंधन (Classical Conditioning): उद्दीपन और प्रतिक्रिया के बीच संबंध
स्थापित करना।
- स्किनर का संनादी अधिगम (Operant Conditioning): सकारात्मक और नकारात्मक सुदृढीकरण के माध्यम से
व्यवहार संशोधन।
- बान्दुरा का सामाजिक अधिगम सिद्धान्त (Social Learning Theory): अवलोकन, अनुकरण, और मॉडलिंग के
माध्यम से सीखना।
- वायगोत्स्की का समीपस्थ विकास क्षेत्र (Zone of Proximal Development): शिक्षक या सहपाठी की
सहायता से सीखने की क्षमता।
- गैग्ने की अधिगम की शर्तें (Conditions of Learning): अधिगम के विभिन्न स्तर (जैसे संकेत,
उद्दीपन-प्रतिक्रिया, समस्या समाधान)।
अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक
- प्रेरणा (Motivation):
- आंतरिक और बाह्य प्रेरणा अधिगम को प्रोत्साहित करती है।
- मास्लो के आवश्यकता क्रम के अनुसार, बुनियादी आवश्यकताएँ पूरी होने पर अधिगम प्रभावी होता है।
- वंशानुक्रम (Heredity):
- जन्मजात बुद्धि और क्षमताएँ अधिगम की गति और स्तर को प्रभावित करती हैं।
- वातावरण (Environment):
- पारिवारिक, सामाजिक, और विद्यालयीय वातावरण अधिगम को प्रभावित करता है।
- उदाहरण: सहायक शिक्षक और प्रेरणादायक स्कूल माहौल सीखने को बढ़ावा देता है।
- स्वास्थ्य और पोषण:
- अच्छा स्वास्थ्य और उचित पोषण संज्ञानात्मक और शारीरिक विकास के लिए आवश्यक हैं।
- संचार माध्यम (Media):
- शैक्षिक सामग्री और डिजिटल संसाधन अधिगम को समृद्ध करते हैं, लेकिन अनुचित सामग्री विचलन पैदा
कर सकती है।
- शिक्षक की भूमिका:
- शिक्षक का व्यवहार, शिक्षण शैली, और प्रोत्साहन अधिगम की प्रभावशीलता को बढ़ाता है।
- रुचि और दृष्टिकोण:
- छात्र की रुचि और सकारात्मक दृष्टिकोण अधिगम को प्रोत्साहित करते हैं।
अधिगम की प्रभावशाली विधियाँ
- आगमन विधि:
- जनक: अरस्तू
- प्रत्यक्ष अनुभवों और उदाहरणों से सामान्य नियमों की ओर।
- लाभ: जिज्ञासा और तार्किक चिंतन को बढ़ावा देता है।
- निगमन विधि:
- जनक: अरस्तू
- सामान्य नियमों से विशिष्ट उदाहरणों की ओर।
- लाभ: त्वरित समझ और संरचित शिक्षण।
- प्रोजेक्ट विधि:
- जनक: जॉन ड्यूई, विलियम किलपैट्रिक
- परियोजनाओं के माध्यम से व्यावहारिक और अनुभव-आधारित अधिगम।
- लाभ: रचनात्मकता और स्वतंत्र चिंतन को बढ़ावा।
- समस्या समाधान विधि:
- छात्र समस्याओं का तार्किक और विश्लेषणात्मक समाधान करते हैं।
- लाभ: आलोचनात्मक चिंतन और निर्णय लेने की क्षमता का विकास।
- खोज विधि:
- प्रवर्तक: जेरोम ब्रूनर
- छात्र स्वयं अन्वेषण और खोज के माध्यम से सीखते हैं।
- लाभ: जिज्ञासा और आत्म-निर्भरता को प्रोत्साहन।
- सहयोगात्मक अधिगम विधि:
- छात्र समूहों में सहयोग करके सीखते हैं।
- लाभ: सामाजिक कौशल और संचार क्षमता का विकास।
- मॉन्टेसरी विधि:
- प्रवर्तक: मारिया मॉन्टेसरी
- स्वतंत्रता और आत्म-निर्देशित अधिगम पर केंद्रित।
- लाभ: व्यक्तिगत रुचियों और गति के अनुसार सीखना।
यूपी टीईटी और सीटीईटी के लिए अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020: समग्र और अनुभव-आधारित अधिगम पर जोर, 5+3+3+4 ढांचा।
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009: 6-14 वर्ष के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा।
- निरंतर और समग्र मूल्यांकन (CCE): शैक्षिक और सह-शैक्षिक गतिविधियों का समग्र मूल्यांकन।
- पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त: संज्ञानात्मक विकास के चार चरण (संवेदी-प्रेरक,
पूर्व-संक्रियात्मक, मूर्त संक्रियात्मक, औपचारिक संक्रियात्मक)।
- एरिक्सन का मनोसामाजिक सिद्धान्त: सामाजिक और संवेगात्मक विकास के आठ चरण।
- चॉम्स्की का भाषा विकास सिद्धान्त: जन्मजात भाषा अधिग्रहण यंत्र (LAD)।
- कोलबर्ग का नैतिक विकास सिद्धान्त: नैतिकता के तीन स्तर और छह चरण।
- भावनात्मक बुद्धि (Emotional Intelligence): डैनियल गोलमैन द्वारा दी गई अवधारणा, जो संवेगों को
समझने और प्रबंधित करने पर केंद्रित है।
- NCERT की भूमिका: पाठ्यक्रम और शिक्षण सामग्री का विकास।
- शिक्षक की भूमिका: अधिगम में मार्गदर्शक, सुगमकर्ता, और प्रेरक।
- समावेशी शिक्षा: विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा में शामिल करना।