शिक्षण एवं शिक्षण विधाएँ
शिक्षण का अर्थ
- शिक्षण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें शिक्षक और छात्र के बीच ज्ञान, कौशल, और मूल्यों का आदान-प्रदान होता है।
- यह एक जानबूझकर और योजनाबद्ध प्रक्रिया है जो छात्रों में व्यवहार परिवर्तन लाती है।
- "शिक्षण वह कला और विज्ञान है जो अधिगम को सुगम बनाता है।" – जॉन ड्यूई
- नोट: शिक्षण छात्र-केंद्रित और प्रेरणादायक होना चाहिए।
शिक्षण के उद्देश्य
- छात्रों में ज्ञान, कौशल, और नैतिक मूल्यों का विकास करना।
- आलोचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान, और सृजनात्मकता को प्रोत्साहित करना।
- छात्रों को सामाजिक, संवेगात्मक, और बौद्धिक रूप से सक्षम बनाना।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुसार समग्र विकास और जीवन कौशलों को बढ़ावा देना।
सम्प्रेषण (Communication)
- शिक्षण में सम्प्रेषण शिक्षक और छात्र के बीच विचारों, भावनाओं, और सूचनाओं का आदान-प्रदान है।
- प्रकार: मौखिक (भाषण), लिखित (लेखन), और गैर-मौखिक (हाव-भाव, चित्र)।
- प्रभावी सम्प्रेषण: स्पष्टता, संक्षिप्तता, और छात्र की रुचि के अनुकूल।
- नोट: शिक्षक का सकारात्मक सम्प्रेषण अधिगम को बढ़ाता है।
शिक्षण के सिद्धान्त
- प्रेरणा का सिद्धान्त: छात्रों की रुचि और प्रेरणा शिक्षण को प्रभावी बनाती है।
- क्रियाशीलता का सिद्धान्त: छात्रों की सक्रिय भागीदारी से अधिगम बेहतर होता है।
- वैयक्तिक भिन्नता का सिद्धान्त: प्रत्येक छात्र की क्षमता और रुचि के अनुसार शिक्षण।
- स्पष्टता का सिद्धान्त: शिक्षण सरल और समझने योग्य होना चाहिए।
- पुनर्बलन का सिद्धान्त: सकारात्मक प्रतिक्रिया से व्यवहार मजबूत होता है (स्किनर)।
शिक्षण के सूत्र
- ज्ञात से अज्ञात की ओर: परिचित से नई जानकारी की ओर।
- प्रत्यक्ष से अप्रत्यक्ष की ओर: ठोस उदाहरणों से अमूर्त अवधारणाओं की ओर।
- स्थूल से सूक्ष्म की ओर: सामान्य से विशिष्ट की ओर।
- विशिष्ट से सामान्य की ओर: उदाहरणों से नियम निकालना।
- आसान से कठिन की ओर: सरल अवधारणाओं से जटिल की ओर।
- नोट: ये सूत्र शिक्षण को व्यवस्थित और प्रभावी बनाते हैं।
शिक्षण प्रविधियाँ
- आगमन विधि: प्रत्यक्ष अनुभवों से सामान्य नियम (अरस्तू)।
- निगमन विधि: सामान्य नियम से विशिष्ट उदाहरण (अरस्तू)।
- प्रोजेक्ट विधि: व्यावहारिक परियोजनाएँ (ड्यूई, किलपैट्रिक)।
- समस्या समाधान विधि: तार्किक और विश्लेषणात्मक समाधान।
- खोज विधि: स्व-अन्वेषण (ब्रूनर)।
- सहयोगात्मक अधिगम: समूह कार्य और सहयोग।
शिक्षण की नवीन विधाएँ (उपागम)
- रचनावादी उपागम (Constructivist Approach): छात्र स्वयं ज्ञान का निर्माण करते हैं (पियाजे, वायगोत्स्की)।
- प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षण: डिजिटल उपकरण, जैसे स्मार्ट बोर्ड, ऑनलाइन संसाधन।
- गतिविधि आधारित शिक्षण: प्रयोग, नाटक, और कला गतिविधियाँ।
- अनुभव आधारित शिक्षण: वास्तविक जीवन अनुभवों पर आधारित (ड्यूई)।
- सहभागी शिक्षण: समूह चर्चा और सहपाठी सहायता (वायगोत्स्की)।
- नोट: NEP 2020 नवीन उपागमों पर जोर देता है।
सूक्ष्म शिक्षण (Micro-Teaching)
- सूक्ष्म शिक्षण शिक्षक प्रशिक्षण की एक तकनीक है जिसमें शिक्षक छोटे समूह में सीमित समय के लिए एक विशिष्ट कौशल सिखाते हैं।
- प्रक्रिया: योजना, शिक्षण, प्रतिक्रिया, पुनः शिक्षण।
- लाभ: शिक्षण कौशलों में सुधार, आत्मविश्वास, और प्रभावी शिक्षण।
- नोट: स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में विकसित।
शिक्षण के आधारभूत कौशल
- प्रस्तुतीकरण कौशल: स्पष्ट और आकर्षक प्रस्तुति।
- प्रश्न पूछने का कौशल: विचारोत्तेजक और स्तरानुसार प्रश्न।
- सुदृढीकरण कौशल: सकारात्मक प्रतिक्रिया और प्रोत्साहन।
- विविधीकरण कौशल: विभिन्न शिक्षण विधियों का उपयोग।
- कक्षा प्रबंधन कौशल: अनुशासन और समय प्रबंधन।
- सम्प्रेषण कौशल: मौखिक और गैर-मौखिक सम्प्रेषण।
यूपी टीईटी और सीटीईटी के लिए अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020: समग्र और अनुभव-आधारित शिक्षण।
- शिक्षा का अधिकार (RTE) 2009: 6-14 वर्ष के लिए अनिवार्य शिक्षा।
- निरंतर और समग्र मूल्यांकन (CCE): शैक्षिक और सह-शैक्षिक मूल्यांकन।
- थॉर्नडाइक का प्रयास और त्रुटि: प्रभाव, अभ्यास, और तत्परता के नियम।
- पैवलव का शास्त्रीय अनुबंधन: उद्दीपन-प्रतिक्रिया संबंध।
- स्किनर का क्रिया प्रसूत अधिगम: सुदृढीकरण आधारित।
- पियाजे का संज्ञानात्मक विकास: उम्र के अनुसार शिक्षण।
- वायगोत्स्की का सिद्धान्त: सामाजिक अंतःक्रिया और ZPD।
- NCERT की भूमिका: पाठ्यक्रम और शिक्षण सामग्री।
- शिक्षक की भूमिका: मार्गदर्शक और सुगमकर्ता।
- समावेशी शिक्षा: विशेष बच्चों की शिक्षा।